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सतर्कता विभाग

 

उद्देश्य

सतर्कता इकाई ने अपने उद्देश्य निम्न प्रकार से परिभाषित किए हैं :-

  1. भ्रष्टाचार एवं अनाचार कम करना ।
  2. निवारक सतर्कता संस्थापित करना ।
  3. प्रणालियां और क्रियाविधि विकसित करने के लिए प्रबंधन को सुझाव देना/सिफारिश करना ।
  4. प्रभावी एवं स्पष्ट निर्णय लेने के लिए कर्मचारियों की सहायता करना ।
  5. कार्य संस्कृति एवं कार्य आचार शास्त्र संपादित करना ।
  6. कर्मचारियों में सतर्कता जागरूकता पैदा करना ।
  7. पारदर्शिता विकसित करना और भेदमूलक शक्तियां कम करना ।

प्रकार्य

मुख्य सतर्कता आयुक्त द्वारा निष्पादित किए जाने वाले सतर्कता के प्रकार्यों का क्षेत्र व्यापक है जिसमें उसके संगठन के कर्मचारियों द्वारा किए गए अथवा संभावित भ्रष्ट व्यवहार के बारे में आसूचना एकत्रित करना, उसको प्रतिवेदित सत्यापनीय आरोपों की जांच करना अथवा जांच की जाने का कारण बनना, संबंधित अनुशासनात्मक प्राधिकारी के आगामी विचारार्थ जांच रिपोर्टों की प्रक्रिया आगे बढ़ाना, यथा आवश्यक परामर्श के लिए मामले आयोग को भेजना, अनुचित व्यवहार/दुराचरण इत्यादि रोकने के लिए कदम उठाना शामिल है । हस प्रकार, मुख्य सतर्कता आयुक्त के प्रकार्यों को मोटे तौर पर निम्नलिखित तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है :-

  1. निवारक सतर्कता
  2. दंडात्मक सतर्कता
  3. निगरानी

जबकि निगरानी और दंडात्मक कार्रवाई दुराचरण और अन्य अनाचार करने के लिए निश्चित रूप से आवश्यक है, वहीं मुख्य सतर्कता आयुक्त द्वारा किए गए निवारक उपाय अपेक्षाकृत अधिक महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनसे सतर्कता के मामले पर्याप्त रूप से कम होने की सभावना है ।

निवारक सतर्कता

उन निवारक उपायों, जो सार्थक रूप से भ्रष्टाचार कम करने के लिए किए जाने चाहिएं, की रूपरेखा प्रस्तुत करते समय, संथानम् समिति ने भ्रष्टाचार के चार बड़े कारण निर्धारित किए हैं - (क) प्रशासनिक विलम्ब (ख) उससे अधिक अपने ऊपर ले रही है, जितना कि वे विनियामक प्रकार्यों के ज़रिए कर सकते हैं (ग) सरकारी सेवकों के भिन्न-भिन्न वर्गों में निहित शक्तियों के प्रयोग में व्यक्तिगत विवेक की गुंजाइश और (घ) उन मामलों, जो नागरिकों के दैनिक कार्यों में महत्वपूर्ण होते हैं, के संबंध में कार्रवाई करने की बोझिल कियाविधियां । इस प्रकार से, मुख्य सतर्कता आयुक्त से आशा की जाती है कि वह निवारक सतर्कता के पक्ष में निम्नलिखित उपाय करें :-

  • उसके संगठन में प्रचलित वर्तमान क्रियाविधि और व्यवहार का अध्ययन करना । यह अध्ययन क्रियाविधि और व्यवहार को आशोधित करने की दृष्टि से किया जाए, जो भ्रष्टाचार के लिए गुंजाइश पैदा करते हैं । साथ ही, विलम्ब का हेतु और उन बिंदुओं, जिन पर विलम्ब होता है, का भी पता लगाने के लिए किया जाए तथा अवस्थाओं में विलम्ब कम करने के लिए उपयुक्त कदम उठाए जाने चाहिएं ।
  • यह देखने की दृष्टि से, विनियामक प्रकार्यों का पुनरीक्षण करना कि क्या उनमें सभी सर्वथा आवश्यक हैं और क्या उन प्रकार्यों को पूरा करने और नियंत्रण की शक्तियों का प्रयोग करने का ढंग सुधार के योग्य है ?
  • विवेकाधिकार के प्रयोग पर नियंत्रण की यथेष्ट पद्धतियां विकसित करना जिससे कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भेदमूलक शक्तियों का प्रयोग मनमाने ढंग से नहीं अपितु एक पारदर्शी एवं उचित ढंग से किया जाता है ।
  • विभिन्न मामलों में कार्रवाई करने की क्रियाविधियों के बारे में नागरिकों को शिक्षित करना और बोझिल क्रियाविधियों को यथासंभव सरल बनाना ।
  • अपने संगठन में ऐसे क्षेत्रों को पहचानना, जो भ्रष्टाचार संभावित हैं और सुनिश्चित करना कि केवल निष्ठासिद्ध कर्मचारी ही वहां पर तैनात किए जाएं ।
  • संदिग्धनिष्ठा के कर्मचारियों की एक सूची तैयार करना-इस सूची में उनके नाम शामिल किए जाएंगे, जो पूछताछ के बाद अथवा जिनमें पूछताछ के क्रम में ऐसी निष्ठा का अभाव पाया जाता है, जैसे कि-
    निष्ठा के अभाव अथवा नैतिक भ्रष्टता के किसी अपराध के आरोप में किसी न्यायालय में सिद्धदोष ठहराया गया हो किन्तु जिस पर आपवादिक परिस्थितियों की दृष्टि से पदच्युति, निकाल दिए जाने अथवा अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दंड अधिरोपित नहीं किया गया है ।
  • निष्ठा के अभाव अथवा सरकारी हित के संरक्षण में ड्यूटी में सकल लापरवाही के आरोप में विभाग की ओर से भारी दंड सुनाया गया है, यद्यपि भ्रष्ट उद्देश्य प्रमाण के योग्य नहीं हो सकता है ।
  • जिसके विरुद्ध निष्ठा के अभाव अथवा नैतिक भ्रष्टता से संबद्ध आरोपित कृत्यों के लिए किसी भारी दंड अथवा किसी न्यायालय में विचारण की कार्यवाहियां चल रही हों ।
  • जिस पर मुकदमा चलाया गया था किन्तु तकनीकी आधार पर दोषमुक्त कर दिया गया था क्योंकि वहां उसकी निष्ठा के बारे में एक उपयुक्त संदेह बन रहा था ।
  • केन्द्रीय जांच ब्यूरो के परामर्श से "स्वीकृत" सूची तैयार करना - इस सूची में उन कर्मचारियों के नाम होंगे, जिनकी ईमानदारी और निष्ठा के बारे में शिकायतें संदिग्ध अथवा भ्रामक हैं ।
  • यह सुनिश्चित करना कि संदिग्ध निष्ठा और स्वीकृत सूची में आ रहे कर्मचारियों को संवेदनशील/भ्रष्टाचार संभावित क्षेत्रों में तैनात नहीं किया जाता है ।
  • कर्मचारियों के आवधिक संबंध सुनिश्चित करना ।
  • यह सुनिश्चित करना कि संगठन द्वारा क्रय संविदा इत्यादि जैसे विषयों पर आवश्यक नीतियां/नियम पुस्तकें (मैनुअल) तैयार कर पुस्तकें समय-समय पर अद्यतन की जाती हैं और आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं ।

दंडात्मक सतर्कता

मुख्य सतर्कता आयुक्त से आशा की जाती है कि वह समाचार-पत्रों में प्रकाशित होने वाली रिपोर्टों, शिकायतों और आरोपों की संवीक्षा करें और उन पर समुचित कार्रवाई करें । मुख्य रूप से, मुख्य सतर्कता आयुक्त से दंडात्मक सतर्कता पहलुओं पर निम्नलिखित कार्रवाई करने की आशा की जाती है :-

  • सभी स्रोतों से शिकायतें प्राप्त करना और यह पता करने की दृष्टि से उनकी संवीक्षा करना यदि आरोपों में कोई सतर्कता कोण संबद्ध है । संदेह की स्थिति में, मुख्य सतर्कता आयुक्त ऐसा मामला अपने प्रशासनिक प्रमुख को भेज सकता है ।
  • ऐसे विनिर्दिष्ट और सत्यापनीय आरोपों, जिनमें कोई सतर्कता कोण संबद्ध है, की जांच करना अथवा जांच कराने का हेतु बनना ।
  • आयोग अथवा केन्द्रीय जांच ब्यूरो द्वारा उसे अग्रेषित आरोपों की जांच करना अथवा उनकी जांच कराने का हेतु बनना ।
  • जांच रिपोर्टों की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ाना जिससे कि की जाने वाली आगामी कार्रवाई के बारे में सक्षम प्राधिकारी के आदेश प्राप्त किए जाएं और जहां आवश्यक हो, वहां जांच रिपोर्टों पर आयोग का परामर्श भ्ंााú प्राप्त करना ।
  • यह सुनिश्चित करना कि संबंधित कर्मचारियों के लिए आरोप-पत्रों का प्रारूप ठीक तैयार और शीघ्रता से जारी किया जाए ।
  • यह सुनिश्चित करना कि जहां आवश्यक है, वहां पूछताछ प्राधिकारी नियुक्त करने में कोई विलम्ब नहीं है ।
  • पूछताछ अधिकारी की रिपोर्ट की जांच करना । जांच, पूछताछ के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रमाण को ध्यान में रखकर और आगे की जाने वाली कार्रवाई के बारे में सक्षम प्राधिकारी के आदेश प्राप्त करने और यथा आवश्यक, आयोग का द्वितीय अवस्था का परामर्श प्राप्त करने के लिए भी की जाए ।
  • सुनिश्चित करना कि संबंधित अनुशासन प्राधिकारी दोषी कर्मचारी पर जुर्माना लगाते समय सकारण आदेश जारी करता है । अनुशासन प्राधिकारी द्वारा जारी किये जाने वाले आदेश में यह दर्शाया जाना चाहिए कि अनुशासन प्राधिकारी ने मस्तिष्क से काम लिया है और अपने स्वतंत्र निर्णय का प्रयोग किया है ।
  • सुनिश्चित करना कि अनुशासनात्मक कार्यवाहियों के बारे में सभी संबंधितों द्वारा सभी अवस्थाओं में नियमों का पालन ईमानदारी से किया जाता है क्योंकि नियमों के उल्लंघन में समस्त कार्यवाहियां रद्द हो जाएंगी ।
  • यह सुनिश्चित करना कि सतर्कता के मामलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए विहित समय सीमा का पालन विभिन्न अवस्थाओं में सर्वथा किया जाता है ।

निगरानी

  • सभी लम्बित मामलों, जैसे कि जांच रिपोर्टों, अनुशासनात्मक मामलों और अन्य सतर्कता संबंधी मामलों का पुनरीक्षण प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में करें ।
  • पारस्परिक हितों के मामलों पर विचार-विमर्श करने के लिए केन्द्रीय जांच ब्यूरो के अधिकारियों के साथ आवधिक बैठकें ।
  • सुनिश्चित करें कि किए गए कार्य की मासिक रिपोर्टें आने वाले माह की पांच तारीख तक आयोग को प्रस्तुत की जाएंगी ।
  • सतर्कता संबंधी मामलों पर किए गए कार्य की पूर्वतम वर्ष की वार्षिक रिपोर्टें अनुवर्ती माह में 30 जनवरी तक आयोग को प्रस्तुत की जाएंगी ।
 
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