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विनियम

राष्ट्रीय आवास बैंक

नई दिल्ली, 27 सितम्बर, 2001

आवास वित्त कंपनी (रा.आ.बैंक) निर्देश 2001

 
अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.1/सीएमडी/2001
 

जबकि, इसे लोकहित में आवश्यक समझते हुए, राष्ट्रीय आवास बैंक ने, राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) के अधीन उसे प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में, प्रत्येक आवास वित्त कंपनी को, 1989 के आवास वित्त कंपनी (रा.आ.बैंक) निर्देश जारी किए थे ।

 

2. और जबकि, राष्ट्रीय आवास बैंक ने आवास वित्त कंपनियों को आय अभिज्ञान, लेखांकन मानक, आस्ति वर्गीकरण, अशोध्य एवं संदिग्ध आस्तियों के लिए प्रावधान,पूंजी पर्याप्तता एवं ऋण/निवेश संकेन्द्रण पर विवेक सम्मत मानदंडों से संबंधित दिशा निर्देश भी जारी किए थे ।

 

3. और जबकि राष्ट्रीय आवास बैंक ने 1987 के अधिनियम में राष्ट्रीय आवास बैंक (संशोधन) अधिनियम, 2000 (2000 का 15) के द्वारा आगे संशोधन किया गया है जिससे राष्ट्रीय आवास बैंक जमाकर्ताओं के हितों को सुरक्षित रख सकें और देश में आवास वित्त कंपनियों की ठोस एवं सार्वभौमिक वृद्धि का संवर्धन हो सके ।

 

4.और जबकि, पूर्वोक्त उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए, यह वांछनीय समझा जाता है कि उन मामलों के संबंध में समेकित निर्देश जारी किए जाएं जा मामले आवास वित्त कंपनियों द्वारा जमाराशियों की स्वीकृति, आय अभिज्ञान, लेखांकन मानकों, आस्ति वर्गीकरण, अशोध्य एवं संदिग्ध आस्तियों के लिए प्रावधान करने, पूंजी पर्याप्तता, ऋण/निवेश संकेन्द्रण से संबंधित हैं और जिन का पालन आवास वित्त कंपनियों की ओर से किया जाना है और जो मामले ऐसी आवास वित्त कंपनियों के लेखा परीक्षकों की रिपो'द में शामिल किए जाएंगे तथा उन सहायक एवं प्रासंगिक मामलों से संबंध रखते हैं —

 

5.अत: जब, राष्ट्रीय आवास बैंक इसे लोकहित में आवश्यक समझते हुए तथा इस बात से संतुष्' होते हुए कि देश में उसके लाभ के लिए आवास वित्त प्रणाली को विनियमित करने में राष्ट्रीय आवास बैंक के सामर्थ्य के प्रयोजन से, निम्नलिखित निर्देश आवश्यक है और एतद,द्वारा राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) की धाराओं 30,30ए,31 एवं 33 में प्रदत्त शक्तियों तथा इस दिशा में सभी सामर्थ्यकारी शक्तियों के प्रयोग मे तथा उपरोक्त उल्लेखित निर्देशों एवं मार्गनिर्देशों के अधिक्रमण में यहां आगे विनिर्दिष्' निर्देश दिए जाते हैं ।

 

अध्याय I - प्रारंभिक

 

निर्देशों का संक्षिप्त नाम, प्रारंभ एवं प्रयोज्यता

1. (1) इन निर्देशों को यथा आवास वित्त कंपनी (रा.आ.बैंक) निर्देश 2001 कहा जाएगा । ये सरकारी राजपत्र के प्रकाशन* की तारीख से लागू हो जाएंगे । इन निर्देशों में इनके प्रारंभ होने की तारीख के लिए कोई संदर्भ उसी तारीख का संदर्भ माना जाएगा ।

अध्याय IV में अन्तर्विष्' निर्देश किसी भी आवास वित्त कंपनी के प्रत्येक लेखा-परीक्षक पर लागू होंगे

  • भारत का राजपत्र, दिनांक 29.12.2001 के भाग III - खण्ड 4 में अधिसूचित परिभाषाएं

2. (1) इन निर्देशों में, जब तक प्रसंग में अन्यथा अपेक्ष्ंित न हो,

(क) "बैंंिधकंग कंपनी" से बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5(ग) में यथा परिभाषित बैंकिंग कंपनी अभिप्रेत है,

(ख) "अवशिष्' मूल्य" का अर्थ उस साम्य पूंजी तथा आरक्षित निधि से होता है जिसमें से अमूर्त आस्तियां और पुनर्मूल्यन आरक्षित निधियां घ'ा दी जाएं तथा जिसे निवेशी कंपनी के साम्य शेयरों की संख्या से विभाजित किया जाए ,

(ग) "वहनीय लागत" का अर्थ आस्तियों के बही मूल्य एवं उन पर प्रोद्भाझत ब्याज किंतु अप्राप्त ब्याज से होता है।

(घ) "कंपनी" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 45झ(कक) में यथा परिभाषित कंपनी अभिप्रेतहै लेकिन इसमें

ऐसी कंपनी शामिल नहीं है जो तत्समय प्रवृत्त किसी नियम के तहत परिसमापनाधीन है,

(ड) "चालू निवेश" का अर्थ उस निवेश से होता है जो अपनी प्रकृति महज ही वसूली योग्य है तथा जो उस तारीख, जिसको ऐसा निवेश किया जाता है, से एक वर्ष से अधिक के लिए नहीं रखा जाना अपेक्षित होता है,

च) "जमाराशि" से वही अभिप्रेत होगा जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम,1934 (1934 का 2) की धारा 45झ(ख ख) में यथा नियत है,

(छ) "जमाकर्ता" का अर्थ उस व्यक्ति से है जिसने किसी आवास वित्त कंपनी में राशि जमा की है, अथवा जो उसका कोई उत्तराधिकारी, वैध प्रतिनिधि, प्रशासक या समनुदेशिती है,

(ज) "संदिग्ध आस्ति" का अर्थ एक सावधि ऋण या कोई पट्टाकृत आस्ति या कोई किराया खरीद आस्ति, या अन्य कोई आस्ति है जोकि दो वर्ष से अधिक की अवधि के लिए एक उपमानक आस्ति रहती है

 

[किंतु यह कि 31 मार्च, 2005 से "संदिग्ध आस्ति" का अर्थ होगा - एक आवधिक ऋण या एक पट्टाकृत आस्ति या एक किराया-क्रय आस्ति या अन्य कोई आस्ति, जो बारह महीनों से अधिक की एक अवधि में मानक आस्ति रहती है] 1

 

(झ) "अर्जन मूल्य" का अर्थ कर उपरांत लाभ के औसत से संगणित किसी साम्य शेयर का मूल्य होता है जिसमें अधिमान लाभांश घ'ा दिया जाता है और असाधारण एवं गैर-आवर्ती मदों के लिए समायोजित किया जाता है । यह समायोजन तत्काल पूर्वगामी तीन वर्षों के लिए होता है तथा आगे निवेशी कंपनी के साम्य शेयरों की संख्या से विभाजित और निम्नलिखित दरों पर पूंजीकृत किया जाता है :-

(i) उत्कृष्' रूप में निर्माता कंपनी के मामले में, 8 प्रतिशत,

(ii) उत्कृष्' रूप में व्यापार करने वाली कंपनी के मामले में, 10 प्रतिशत

(iii) किसी आवास वित्त कंपनी सहित किसी अन्य कंपनी के मामले में, 12 प्रतिशत

 

'प्पणी:

यदि कोई निवेश क ंपनी घा'ट में चलने वाली कंपनी है, तब अर्जन मूल्य यथा शून्य लिया जाएगा;

1 अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.3/सीएमडी/2002 दिनांक 27 दिसम्बर, 2002 के अनुच्छेद 1 द्वारा सम्मिलित (18.01.2003 से प्रभावी)

(') "उचित मूल्य" का अर्थ अर्जन मूल्य तथा अवशिष्' मूल्य के साधन से है,

(ठ) "निर्बाध आरक्षित निधियां" में शेयर प्रीमियम खाता,पूंजी और डिबेंचर, शोधन निधि में शेष तथा अन्य कोई आरक्षित निधि शामिल होगी जिसे कंपनी के तुलन पत्र में दर्शाया या प्रकाशित किया गया हो जो ऐसी आरक्षित निधि न हो (1) जिसका सृजन भविष्य की किसी देयता के प्रतिसंदाय या आस्तियों के अवक्षयण या अशोध्य ऋणों के लिए किया गया हो या (2) जिसका सृजन कंपनी की आस्तियों के पुनर्मूल्यांकन द्वारा किया गया हो ,

(ड) "आवास वित्त कंपनी" का अर्थ कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन निगमित एक ऐसी कंपनी होता है जो मुख्य रूप से लेनदेन करती है या चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष में, आवास हेतु वित्त प्रदान करने का व्यापार चलाना उसके प्रधान उद्देश्यों में से एक होता है।

(ढ) "संकर ऋण" का अर्थ उस पूंजी लिखत से है जिसमें ऋण की विशेषताओं के अतिरिक्त साम्य पूंजी की कतिपय विशेषताएं होती हैं,

(ण) "ऋणदाता सार्वजनिक वित्त संस्थान" का अर्थ -

(i) कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 4ए के तहत या इसके अधीन विनिर्दिष्' कोई सार्वजनिक वित्तीय संस्थान,या

(ii) कोई राज्य वित्तीय निगम या कोई राज्य औद्योगिक विकास निगम, या

(iii) कोई अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, या

(iv) साधारण बीमा कारबार (राष्'ïाúयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) की धारा 9 के उपबंधों के अनुसरण में स्थापित साधारण बीमा निगम, या

(v) अन्य कोई संस्थान जिसे राष्'ïाúय आवास बैंक इस दिशा में, अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्' करे,

(त) "दीर्घकालीन निवेश" का अर्थ चालू निवेश के अतिरिक्त कोई अन्य निवेश,

(थ) "हानिप्रद आस्तियों" का अर्थ -

(i) ऐसी कोई आस्ति जिसकी पहचान आवास वित्त कंपनी या उसको आंतरिक या बाह्य लेखा-परीक्षक या राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा तब तक हानिप्रद आस्ति के रूप में की जाती है, जब तक यह आवास वित्त कंपनी द्वारा बट्टे खाते में नहीं डाल दी जाती है, और

[(ii) कोई आस्ति, जो निम्नलिखित में से किसी एक कारण अर्थात् वसूल नहीं होने की किसी संभाव्य आशंका से प्रतिकूल रूप से प्रभावित है :

(क) प्रतिभूत ऋण्ंाटं एवं अग्रिमों के मामले में, या तो प्राथमिक या समर्थक प्रतिभूति की अनुपलब्धता,

(ख) या तो प्राथमिक या समर्थक प्रतिभूति के म्झधल्य में कमी पाई जाती है,

(ग) बीमा संबंधी दावा, यदि कोई है, को नकार दिया या भागत: परिनिर्धारित कर दिया गया है,

(घ) उधारकर्ता की ओर से कप'पूर्ण कृत्य या कोई भूल,

(ड) परिसीमा अधिनियम, 1963 (1963 कर 36) के अधीन काल बाधित हो रहा कोई ऋण,

(च) अपूर्ण या दोषपूर्ण दस्तावेज

 

स्पष्'ाúकरण - संदेह निवारणार्थ, यह स्पष्' किया जाता है कि देय राशियों की वसूली के लिए उधारकर्ता/गारं'ाúदाता के विरुद्ध वाद प्रस्तुत करने के

लिए आवास वित्त कंपनी के अधिकार मात्र से राष्ट्रीय आवास बैंक या लेखा-परीक्षकों को पूर्वोक्त कारणों से किसी आस्ति या उसके भाग को

यथा हानि आस्ति मानने से वंचित नहीं हो जाते है ।] 1

 

1 . अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.3/सीएमडी/2002 दिनांक 27 दिसम्बर, 2002 के अनुच्छेद 2द्वारा प्रतिस्थापित (18.01.2003 से प्रभावी)

(थ) "निवल आस्ति मूल्य" का अर्थ है संबंधित म्युचुअल फंड द्वारा विनिर्दिष्' योजना के संबंध में वर्तमान में घोषित निवल आस्ति मूल्य,

(द) "निवल बही मूल्य" का अर्थ है -

(i) किराया खरीद आस्ति के मामले में, कुल देय राशि एवं प्राप्त भावी किस्तें, जिनमें से अपरिपक्व वित्त प्रभारों की शेष राशि को घ'ा कर और आगे इन निर्देशों के अनुच्छेद 24(2)(1) के अनुसार किए गए प्रावधानों की राशि भी घ'ा दी जाती है ,

(ii) पट्टाकृत आस्तियों के मामले में, यथा प्राप्य लेखा प्रदत्त अतिदेय पट्टा किराए के पूंजी अंश का कुल योग और पट्टा समायोजन लेखा की शेष राशि से यथा समायोजित पट्टा आस्ति का अवक्षयित बही मूल्य होता है,

(ध) "निवल स्वाधिकृत निधि" का अर्थ वह निवल स्वाधिकृत निधि होता है जो उन चुकता अधिमान शेयरों, जोकि अनिवार्य रूप से साम्य पूंजी में संपरिवर्तनीय है, के सहित, 1987 के राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम की धारा 29ए में परिभाषित हैं,

(न) "अनुपयोज्य आस्तियां" (जिन्हें इन निर्देशों में यथा अनुपयोज्य आस्तियां विनिर्दिष्' किया गया है) का अर्थ :

(i) कोई ऋण आस्ति, जिसके संबंध में ब्याज 6 महीने के लिए "विगत देय" रहता है,

(ii) असंदत ब्याज सहित कोई सावधि ऋण - जब किस्त 6 माह से अधिक के लिए अतिदेय हो या जिस पर ब्याज की राशि 6 माह के लिए विगत देय रही,

(iii) कोई विनिमय-पत्र जो 6 माह के लिए अतिदेय रहता है,

(iv) अल्पावधि ऋणों/अग्रिमों की प्रकृति में, "अन्य वर्तमान आस्तियां" शीर्ष के अधीन, किसी ऋण या किसी प्राप्य पर आय के संबंध में ब्याज, और जो सुविधा 6 माह की अवधि के लिए अतिदेय रही, संबंध में ब्याज, और जो सुविधा 6 माह की अवधि के लिए अतिदेय रही, अतिदेय रही,

(vi) पट्टा किराया एवं किराया खरीद की किस्तें जो 12 माह से अधिक की अवधि के लिए अतिदेय हो गई हैं,

(vii) कोई अंतर कंपनी जमा राशि, जिसके संबंध में ब्याज या मूलधन 6 माह की अवधि में अतिदेय रहा,

 

कन्तु यह कि 31 मार्च, 2005 से, "अनुपयोज्य आस्ति" का अर्थ होगा :

(i) ऐसी कोई आस्ति, जिसके संबंध में, ब्याज नब्बे दिन या अधिक की किसी अवधि में अतिदेय रहा है,

(ii) अदत्त ब्याज सहित कोई आवधिक ऋण - जब उसकी किस्तें नब्बे दिन या अधिक की किसी अवधि में अतिदेय है या जिस पर ब्याज की राशि नब्बे दिन या अधिक की अवधि के लिए अतिदेय रही,

(iii) मांग या शीघ्रावधि मांग ऋण, जो मांग या शीघ्रावधि मांग की तारीख से नब्बे दिन या अधिक की अवधि की किसी अवधि में अतिदेय रहा या जिस पर ब्याज की राशि नब्बे दिन या अधिक की किसी अवधि में अतिदेय रही,

(iv) ऐसा कोई बिल जो नब्बे दिन या अधिक की किसी अवधि में अतिदेय रहा,

(v) अल्पावधि ऋणों/अग्रिमों की प्रकृति में "अन्य चालू आस्तियां" शीर्ष के अधीन आय पर प्राप्य राशियों या किसी ऋण के संबंध में ब्याज - जिसकी सुविधा नब्बे दिन या अधिक की किसी अवधि में अतिदेय रही, आस्तियों के विक्रय, की गई सेवाओं या उपगत व्यय की प्रतिपूर्ति के मद्दे कोई देय राशि, जो नब्बे दिन या अधिक की किसी अवधि में अतिदेय रही,

(vii) पट्टा किराया या किराया खरीद की किस्त, जो नब्बे दिन या अधिक की किसी अवधि में अतिदेय हो गई है,

(प) "स्वाधिकृत निधि" का अर्थ ऐसी स्वाधिकृत निधि है जिसमें साम्य शेयरों में अनिवार्यत: संपरिवर्तनीय अधिमान शेयरों सहित चुकता पूंजी, निर्बध

 

आरक्षित निध्ंिायां, शेयर प्रीमियम लेखा में शेष राशि, आस्तियों की बिक्री की राशि में से उत्पन्न अधिशेष जताने वाली पूंजी आरक्षित निध्ंिायां आती हैं, किन्तु आस्ति के पुनर्मूल्यन से निमित वे आरक्षित निधियां शामिल नहीं हैं, जिनमें से संचित हानि की शेष राशि, अमूर्त आस्तियों का बही मूल्य तथा आस्थगित राजस्व व्यय, यदि कोई है, को घ'ा दिया जाता है ,

(फ) "विगत देय" का अर्थ आय या ब्याज की कोई राशि जो देय तारीख के बाद 30 दिनों की अवधि के लिए असंदत्त रहती है,

(ब) "सार्वजनिक निक्षेप" से निक्षेप अभिप्रेत है, लेकिन इसमें निम्नलिखित शामिल नहीं हैं, अर्थात् :

(i) केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार से प्राप्त कोई राशि या किसी अन्य स्रोत से प्राप्त कोई राशि और जिसका प्रतिसंदाय केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा गारं'ाúशुदा हो या किसी स्थानीय प्राधिकरण या किसी सार्वजनिक आवास एजेंसी या किसी विदेशी सरकार या किसी अन्य विदेशी नागरिक, प्राधिकरण या व्यक्ति से प्राप्त राशि,

(ii) राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) के तहत स्थापित राष्ट्रीय आवास बैंक या भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 (1964 का 18) के तहत स्थापित भारतीय औद्योगिक विकास बैंक या जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 (1956 का 31) के तहत स्थापित भारतीय जीवन बीमा निगम या साधारण बीमा कारोबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) की धारा 9 के उपबंधों के अनुसरण में स्थापित भारतीय साधारण बीमा और उसकी सहायक कंपनियों या भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक अधिनियम, 1989 (1989 का 39) के तहत स्थापित भारतीय यूनि' 'ïस्' अधिनियम 1963 (1963 का 52) के तहत स्थापित भारतीय यूनि' 'ïस्' या राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम 1982 के तहत स्थापित राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक या विद्युत (आपूर्ति) अध्ंिानियम 1948 के तहत गठित विद्युत बोर्ड या तमिलनाडु औद्योगिक ऋण एवं निवेश निगम लि. या दि इण्डसि्'ïयल फाइनेंस कारपोरेशन आफ इंडिया लि. या भारतीय औद्योगिक निवेश बैंक लि. या भारतीय राज्य व्यापार निगम लि. या महाराष्'ï राज्य विद्युतीकरण निगम लि. या भारतीय खनिज एवं घातु व्यापार निगम लि. या कृषि वित्त निगम लि. या महाराष्'ï राज्य औद्योगिक एवं निवेश निगम लि. या गुजरात औद्योगिक निवेश निगम लि. या एशियाई विकास बैंक या अंतर्राष्'ïाúय वित्त निगम या विदेशी आर्थिक सहयोग निधि (ओईसीएफ) या क्रेडि'ठनस्'ठल्' फर वाइडरआफबो (केएफडब्ल्यू) या किसी अन्य संस्था, जिसे इस निमित्त राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा विनिर्दिष्' किया जाए, से प्राप्त कोई राशि,

1 . अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.3/सीएमडी/2002 दिनांक 27 दिसम्बर, 2002 के अनुच्छेद 3द्वारा सम्मिलित (18.01.2003 से प्रभावी)

 

(iii)किसी आवास वित्त कंपनी द्वारा अन्य कंपनी से प्राप्त राशि,

(iv)शेयर, स्'ाणक, बांड या डिबेंचरों का आबं'न लंबित रहने तक उक्त किसी भी शेयर, स्'ाणक, बांडों या डिबेंचरों में अभिदान के तौर पर प्राप्त कोई राशि और आवास वित्त कंपनी के अंतनियमों के तहत सदस्यों को प्रतिसंदेय नहीं है,

(v) ऐसे व्यक्ति से प्राप्त कोई राशि, जो राशि की प्राप्ति के समय आवास वित्त कंपनी का निदेशक था या किसी गैर-सरकारी आवास वित्त कंपनी द्वारा अपने शेयरधारकों से प्राप्त कोई राशि या ऐसी गैर-सरकारी आवास वित्त कंपनी द्वारा प्राप्त कोई राशि, जो कं पनी अधिनियम, 1956 की धारा 43क के तहत सार्वजनिक आवास वित्त कंपनी बन गई है और अपने अंतनियमों में कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 3 की उपधारा (1) के खंड

(iii) में विनिर्दिष्' मामलों से संबंधित उपबंधों को शामिल करना जारी रखती है : परन्तु यह कि यथास्थिति, निदेशक या शेयरधारक, जिससे राशि प्राप्त हुई है, राशि देते समय आवास वित्त कंपनी को लिखित रूप में इस आशय का घोषणा-पत्र प्रस्तुत करता है कि यह राशि अन्यों से उधार लेकर या राशियां स्वीकार करके उसके द्वारा अर्जित निधियों में से नहीं दी जा रही हैं, इसके अतिरिक्त, यह भी कि किसी प्राइवे' लि. कं पनी के संयुक्त शेयरधारकों के मामले में, पहले नाम वाले शेयरधारक को छोड़कर उनसे या संयुक्त शेयरधारकों के नाम में प्राप्त धन कंपनी के शेयरधारकों से प्राप्त हुआ धन समझा जाने के लिए ग्राह्य नहीं होगा,

(vi) आवास वित्त कंपनी की किसी अचल सम्पत्ति या किसी अन्य परिसम्पत्ति के बंधक द्वारा प्रतिभूत ऐसे बांडों öया डिबेंचरों या उन्हें आवास वित्त कंपनी के शेयरों में परिवर्तित करने के विकल्प के साथ जारी किए गए बांडों या डिबेंचरों द्वारा जु'ाई गई कोई राशि, परंतु किसी अचल सम्पत्ति कें बंधक द्वारा प्रतिभूत या अन्य परिसंपत्ति द्वारा प्रतिभूत ऐसे बांडों या डिबेंचरों के मामले में, ऐ बांडों या डिबेंचरों की राशि ऐसी अचल सम्पत्ति/अन्य परिसम्पत्ति के बाजार मूल्य से अधिक नहीं होगी,

 

(vii) प्रवर्तकों द्वारा निम्नलिखित शर्तों को पूर्ण करने के अध्यधीन, ऋणदाता संस्थाओं की शर्तों के अनुसरण में अप्रतिभूत ऋण के रूप में लाई गई कोई राशि, अर्थात्,

(क) यह ऋण ऐसे वित्त का अंशदान करने हेतु प्रवर्तकों की बाध्यता को पूरा करने के लिए ऋणदाता सार्वजनिक वित्तीय संस्था द्वारा लगाई गई शर्तों के अनुसरण में लाया जाता है,

(ख) यह ऋण प्रवर्तकों द्वारा स्वयं/और या उनके संबंधियों द्वारा प्रदान किया जाता है, और न कि उनके मित्रों एवं कारोबार सहयोगियों द्वारा, और

(ग) इस उपखंड के अन्तर्गत छू' केवल तब तक उपलब्ध होगी, जब तक ऋणदाता सार्वजनिक वित्तीय संस्था के ऋण का प्रतिसंदाय नहीं कर दिया जाता एवं उसके बाद नहीं,

(viii)भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (म्युचुअल फंड्स) विनियमन, 1996 से संचालित म्युचुअल फंड से ङ्राप्त कोई राशि,

(ix)संकर ऋण या गौण ऋण जिसकी न्यूनतम परिपक्वता अवधि 60 माह से कम नहीं है, के रूप में प्राप्त कोई राशि,

(x) किसी आवास वित्त कंपनी के निदेशक के किसी संबंधी से प्राप्त हुई कोई राशि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (म्युचुअल फंड) विनियमन, 1996 से संचालित म्युचुअल फंड से प्राप्त कोई राशि, संकर ऋण या गौण ऋण जिसकी न्यूनतम परिपक्वता अवधि 60 माह से कम नहीं है, के रूप में प्राप्त कोई राशि, किसी आवास वित्त कंपनी के निदेशक के किसी संबंधी से प्राप्त हुई कोई राशि, ि'प्पणी :निक्षेप केवल जमाकर्ता द्वारा दिए आवेदन पर स्वीकार किया जाएगा । जिसमें यह घोषणा अन्तर्विष्' हो कि निक्षेप तारीख पर, वह कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में यथा परिभाषित एक संबंधी की हैसियत से विनिर्दिष्' निदेशक से संबंधित है,

(भ) "सार्वजनिक आवास एजेंसी" में ऐसा कोई भी प्राधिकरण शामिल होगा जो किसी नियम द्वारा या उसके तहत भारत में गठित किया गया हो, जो या तो आवास व्यवस्था की आवश्यकता पर कार्यवाही करने और उसे पूरा करने के प्रयोजन में लगा हो या जो शहरों, कार्यालयों और गांवों या दोनों की योजना बनाने, विकास या सुधार करने के प्रयोजन में लगा हो,

(म) "प्रतिभूतियों" से प्रतिभूत संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) की धारा 2(ज) में यथा परिभाषित प्रतिभूतियां अभिप्रेत हैं,

(य) "मानक आस्ति" का अर्थ ऐसी आस्ति होती है, जिसके संबंध में मूलधन के पुनर्भुगतान या ब्याज के भुगतान में कोई व्यतिक्रम नहीं दिखता है और जिससे कोई समस्या नहीं होती है और न ही इसमें व्यापार से जुड़े सामान्य जोखिम से अधिक जोखिम ही होते हैं,

(र) "उप-मानक आस्ति" का अर्थ -

(i) एक ऐसी आस्ति, जिसे दो वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए अनुपयोज्य आस्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है ।

[किन्तु यह कि 31 मार्च, 2005 से कोई आस्ति, जिसे बारह माह से अनधिक की अवधि के लिए यथा अनुपयोज्य आस्ति वर्गीकृत किया गया है, एक उप-मानक आस्ति होगी,] 1

(ii)एक ऐसी आस्ति है, जहां ऋण की कोई किस्त जारी करने के बाद ब्याज और/या मूलधन के बारे में करार की शर्ते बातचीत से पुन: तय की गई है या पुनर्निर्धारित हुई हैं या एक ऐसी अंतर जमाराशि तक आगे बढ़ायी जाती रही है, पुन: तय की गई या पुनर्निर्धारित शर्तों के अधीन संतोषजनक निष्पादन का एक वर्ष समाप्त हो जाने तक उसे "उप-मानक" माना जाएगा,

1 . अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.3/सीएमडी/2002 दिनांक 27 दिसम्बर, 2002 के अनुच्छेद 4 द्वारा सम्मिलित (18.01.2003 से प्रभावी)

 
 

किंतु यह कि जहां किसी परियोजना के पूरी होने में विलंब कारण उस परियोजना को क्रियान्वित करने वाले अभिकरण के नियंत्रण से परे होता है, वहां ब्याज और/या मूलधन के बारे में ऋण करार की शर्तों को परियोजना पूरी होने से पूर्व एक बार पुनर्निर्धारित किया जा सकता है और ऐसे ऋण को इस शर्त के अध्यधीन यथामानक आस्ति समझा जाए कि ऐसे पुनर्निर्धारण की अनुमति केवल एक बार संबंधित आवास वित्त कंपनी के निदेशक मंडल की ओर से दी जाएगी और यह कि ऐसे ऋण पर नियमित रूप से दिया जाता है और कोई व्यतिक्रम नहीं होता है, इसके अतिरिक्त, यह भी कि जहां प्राकृतिक आपदाएं उधारकर्ता की पुनर्भुगतान करने की क्षमता को कमजोर कर देती हैं, वहीं ब्याज और/या मूलधन के बारे मे ऋण करार की शर्तों को पुनर्निर्धारित किया जा सकता है तथा ऐसे ऋणों को यथा उप-मानक वर्गीकृत नहीं किया जाएगा । ऐसे ऋणों का वर्गीकरण इसके बाद संशोधित नियम एवं शर्तों के अनुसार संचालित होगी,

(ल) "गौण ऋण" का अर्थ एक पूर्णतया चुकता पूंजी लिखत होती है जोकि अप्रतिभूत तथा अन्य लेनदारों के दावों से गौण बना दिया जाता है और यह प्रतिबंधात्मक खंडों से मुक्त होता है और धारक के अनुरोध पर या आवास वित्त कंपनी के पर्यवेक्षणीय प्राधिकारी की सहमति के बिना प्रतिदेय नहीं है । ऐसी लिखत का बही मूल्य बट्टा का'ने के अध्यधीन होगा, जैसाकि यहां नीचे दिया जा रहा है:

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लिखत की शेष परिपक्वता बट्टा दर (प्रतिशत)

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(i) एक वर्ष तक 100

(ii) एक वर्ष से अधिक परंतु 2 वर्ष तक 80

(iii) दो वर्ष से अधिक परंतु 3 वर्ष तक 60

(iv) तीन वर्ष से अधिक परंतु 4 वर्ष तक 40

(v) चार वर्ष से अधिक परंतु 5 वर्ष तक 20 जितने तक ऐसा बट्टागत मूल्य ि'यर-1 पूंजी के पचास प्रतिशत से अधिक नहीं हो जाता है,

(व) "पर्याप्त हित" का अर्थ किसी व्यक्ति या उसके पत्नी या उसके प्रति या अवयस्क बच्चे का चाहे एकल रूप में या एक साथ मिलकर किसी कंपनी के

ध शेयरों में लाभकारी हित होना जिस पर संदत्त राशि उस कंपनी की चुकंता पूंजी के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं है या किसी भागीदारी फर्म के सभी भागीदारों द्वारा अभिदत्त पूंजी होता है,

(श) "ि'यर । पूंजी" का अर्थ है स्वाधिकृत निधि, जिसमें से अन्य आवास वित्त कंपनियों के शेयरों, ऋणपत्रों, बंधपत्रों में निवेश, सहायक कंपनियों को दिया गया किराया खरीद एवं पट्टा वित्त और उनमें तथा उसकी समूह की कंपनियों में जमा की गई राशियों सहित ऋण एवं अग्रिम जोकि कुल योग में स्वाधिकृत निधियों के 10 प्रतिशत से अधिक होता है, घ'ाया गया हो,

(ष) "ि'यर-।।" पूंजी में निम्नलिखित शामिल हैं :

(i) अधिमान शेयर (उन्हें छोड़कर जो साम्य पूंजी में अनिवार्यत: संपरिवर्तनीय हैं),

(iii) 55 प्रतिशत की बट्टागत दर पर पुनर्मूल्यन आरक्षित निधियां,

(iv) उतनी राशि तक, सामान्य प्रावधान एवं हानिगत आरक्षित निधियां, जितने तक इन्हें मूल्य में वास्तविक ह्सा, या किसी विनिर्दिष्' आस्ति में पहचान योग्य संभाव्य हानि के कारण से हुए नहीं माना जा सकता है और जोखिम भारित आस्तियों के एक और एक चौथाई प्रतिशत तक अनायास हानियों को पूरी करने के लिए उपलब्ध है,

(iv) संकरण ऋण

(v) गौण ऋण

 

उस सीमा तक, जितने तक कि कुल योग ि'यर-I पूंजी से अधिक नहीं होता है ;

[(रच) `छो'ाú जमा राशि' का अर्थ है कि सार्वजनिक जमा राशि का सकल योग आवास वित्त कंपनी की सभी शाखाओं में एक ही हैसियत में एक मात्र या प्रथम नामधारी जमाकर्ता के नाम में 10,000/- रु. से अधिक नहीं होना चाहिए ।] 1

(2) प्रयुक्त, किंतु यहां अपरिभाषित और अधिनियम में परिभाषित शब्द एवं अभिव्यक्तियों का वहीं अर्थ होगा जो उन्हें वहां दिया गया है । यहां या अधिनियम में अपरिभाषित शब्द और अभिव्यक्तियों का वही अर्थ होगा जो उन्हें भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2), बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) तथा कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में समनुदेशित किया गया है ।

(3) (क) यदि ऐसा कोई प्रश्न उठता है कि कोई कंपनी वित्तीय संस्थान है या नहीं तो केन्द्रीय सरकार के साथ परामर्श करके राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा ऐसे प्रश्न का विनिश्चय किया जाएगा ।

(ख) यदि ऐसा कोई प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या कोई कंपनी एक आवास वित्त कंपनी है, तो उसका विनिश्चय राष्ट्रीय आवास बैंक करेगा

 

अध्याय II - सार्वजनिक निक्षेप स्वीकार करना

 

निक्षेप स्वीकार करने पर प्रतिबंध

 

3(1) ऐसी कोई आवास वित्त कंपनी जिसकी निवल स्वाधिकृत निधि (इसके बाद जिसे नि.स्वा.नि.) 25 लाख रुपए से कम है, सार्वजनिक निक्षेप स्वीकार नहीं करेगी,

(2) ऐसी कोई आवास वित्त कंपनी जिसकी निवल स्वाधिकृत निधि 25 लाख रुपए और इससे अधिक है, सार्वजनिक निक्षेप निम्न उल्लेखित सीमा के अतिरिक्त, स्वीकार या नवीनीकरण नहीं करेगी :

कंपनी की निवल स्वाधिकृत निधि के पांच गुणा से अनधिक, बशर्ते जहां आवास वित्त कंपनी ने वर्ष में कम से कम एक बार किसी अनुमोदित ऋण पात्रता निर्धारण एजेंसी से सावधि निक्षेपों के लिए कम से कम "ए" ऋण पात्रता निर्धारण प्राप्त किया हो और ऋण पात्रता निर्धारण की एक प्रति रा.आ.बैंक को भेजी गई हो तथा कंपनी सभी विवेक सम्मत मानदंडों का अनुपालन करती हो, और ऊपर (i) में किए गए उल्लेखानुसार ऋण पात्रता निर्धारण न होने पर, अपनी निवल स्वाधिकृत निधि के दुगुने या दस करोड़ रुपए, जो भी कम हो, से अनधिक जिसमें इन निक्षेपों को स्वीकार या नवीनीकरण करने की तारीख को उसकी बहियों में कोई भी बकाया राशि शामिल होगी बशर्ते (क) वह सभी विवेकसम्मत मानदंडों का अनुपालन कर रही हो, और (ख) पिछले संपरीक्षित तुलनपत्र के अनुसार पूंजी पर्याप्तता अनुपात 15 प्रतिशत से कम न हो,

1. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.9/सीएमडी/2005 दिनांक 10 जनवरी, 2005 द्वारा सम्मिलित अनुमोदित ऋण पात्रता निर्धारण एजेंसियां वर्तमान में अनुमोदित ऋण पात्रता निर्धारण एजेंसियों के नाम निम्न प्रकार है:

(क) दि क्रेडि' रेि'ंग इंफार्मेशन सर्विसेज आफ इंडिया लि. (क्रिसिल)

(ख) इकरा लि.

(ग) क्रेडि' एनालिसिस एंड रिसर्च लि. (केयर)

(घ) फिच रेि'ंग इंडिया प्रा. लि.

[(3) कोई भी आवास वित्त कंपनी, सार्वजनिक जमा राशियों को शामिल करके ऐसी जमा राशियों, जिनकी मूल राशि उसके द्वारा धारित राशियों, यदि कोई हैं, जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 45आई की उप धारा (बीबी) के खंड 3 से 7 में और इसी प्रकार ऋणों या राष्ट्रीय आवास बैंक से अन्य सहायता में निर्दिष्' हैं, के साथ उसकी निवल स्वाधिकृत निधि से सोलह गुणा अधिक हैं, को नहीं रखेगी ।] 1

(4) जहां आवास वित्त कंपनी इन निर्देशों के आरंभ होने की तारीख को, ऊपर (2) में निर्दिष्' सीमा से अधिक सार्वजनिक निक्षेप रखती हो और जो इस पर लागू हैं या ऊपर (3) में उल्लिखित मदों सहित निक्षेप ऊपर (3) में निर्दिष्' सीमा से अधिक हैं तो कंपनी -

 

(क) नए निक्षेप स्वीकार नहीं करेगी या नए निक्षेप खाते नहीं खोलेगी, या

(ख) मौजूदा निक्षेपों का नवीनीकरण नहीं करेगी या जब किसी आवृत्ति योजना के अन्तर्गत निक्षेप राशि जमा हो रही है, योजना अवधि सम ाप्त होने के बाद उस योजना के अन्तर्गत किस्तें प्राप्त नहीं करेगी,

(ग) सीमा से अधिक जमा निक्षेपों को परिपक्वता पर पुनर्भुगतान कर कम करेगी ।

 

(5) आवास वित्त कंपनी द्वारा पहले धािरत ऋण पात्रता निर्धारण के बाद, "ए" से नीचे के किसी भी ऋण पात्रता निर्धारण स्तर पर होने पर, कंपनी

(i) राष्ट्रीय आवास बैंक को 15 दिन के भीतर स्थिति की सूचना भेजेगी,

(ii) यदि उसके पास धारित जमाराशि ऊपर अनुच्छेद 3(2) की धारा (ii) में निर्देष्' सीमा से अधिक हो, तो नए सार्वजनिक निक्षेप तुरंत प्रभाव से स्वीकार नहीं करेगी एवं

(iii) ऋण पात्रता निर्धारण का स्तर घ'ने की तारीख से 3 वर्ष के अंदर उल्लिखित सार्वजनिक निक्षेप राशि को उसके देय होने की तारीख पर पुनर्भुगतान करके या अन्यथा, कम करके "शून्य" पर या ऊपर अनुच्छेद 3(2) की धारा (ii) में उल्लिखित अनुमत्य सीमा, पर जैसा भी मामला हो, लाएगी ।

 

नक्षेपों की अवधि

 

3. कोई भी आवास वित्त कंपनी कोई भी सार्वजनिक निक्षेप स्वीकार या नवीनीकरण नहीं करेगी,

(क) जो मांग पर या नोि'स पर संदेय है, या

(ख) जब तक ऐसे निक्षेप उन्हें स्वीकार करने या उनका नवीनीकरण करने की तारीख से कम से कम 12 माह एवं अधिक से अधिक 84 माह उपरांत पुनर्भुगतान के लिए संदेय हो

1. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.4/सीएमडी/2003 दिनांक 31 जनवरी, 2003 द्वारा प्रतिस्थापित (22.02.2003 से प्रभावी) जब सार्वजनिक निक्षेप किस्तों में हो, तो ऐसे निक्षेप की अवधि की गणना प्रथम किस्त प्राप्ति की तिथि से की जाएगी । स्पष्'ाúकरण संयुक्त जमा राशियां

 

4. जहां वांछित हो, जमा राशियां संयुक्त नामों से स्वीकार की जा सकती हैं, जिसमें "आइदर और सर्वाइवर" "नम्बर वन और सर्वाइवर/स", "एनीवन और सर्वाइवर/स", जैसा वाक्य खण्ड हो या नहीं हो ।

 

सार्वजनिक निक्षेप स्वीकार किए जाने वाले आवेदन पत्र में उल्लेखित किए जाने वाले ब्योरे

 

6(i) कोई भी आवास वित्त कंपनी किसी भी सार्वजनिक निक्षेप को उसके द्वारा जारी प्रपत्र पर जमाकर्ता द्वारा लिखित में आवेदन करने के अतिरिक्त, स्वीकार या उनका नवीनीकरण नहीं करेगी, इस प्रपत्र में वह सभी विवरण होंगे जो गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों एवं विविध गैर-बैंकिंग कंपनी (विज्ञापन) नियम, 1977 में उल्लिखित हैं, जिन्हें कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 58क के अन्तर्गत तैयार किया है और इसमें जमाकर्ताओं की विशेष श्रेणी अर्थात क्या जमाकर्ता आवास वित्त कंपनी का अंशधारक या निवेशक या प्रवर्तक है या सामान्य नागरिक है या कंपनी के निदेशक का संबंधी है, के ब्योरे भी दिए गए हैं ।

(ii) आवेदन फार्म में निम्नलिखित सूचनाएं भी निहित होंगी :

(क) उसके निक्षेप को प्रदान की गई ऋण पात्रता का निर्धारण और आवास वित्त कंपनी की ऋण पात्रता का निर्धारण करने वाली ऋण पात्रता निर्धारण एजेंसी का नाम,

(ख) इस आशय का एक विवरण कि आवास वित्त कंपनी द्वारा अपने निक्षेपों को चुकाने में किसी चूक के मामले में, जमाकर्ता राहत के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण मंच, राज्य स्तरीय उपभोक्ता विवाद निवारण मंच या जिला स्तरीय उपभोक्ता विवाद निवारण मंच में जा सकता है,

(ग) इस आशय का कथन कि निक्षेपों में अनुबद्ध निबंधन एवं शर्तों के अनुसार संपूर्ण निक्षेप या उसके किसी भाग की गैर अदायगी की दशा में, जमाकर्ता राष्ट्रीय आवास बैंक के प्राधिकृत अधिकारी को अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकता है,

(घ) इस आशय का एक कथन कि आवास वित्त कंपनी की वित्तीय स्थिति जैसाकि प्रक' किया गया है और आवेदन फार्म में दिए गए अभ्यावेदन सही और ठीक हैं तथा आवास वित्त कंपनी और उसका निदेशक बोर्ड उसकी शुद्धता और सत्यता के लिए जिम्मेदार है,

(ड) इस आशय का एक कथन कि आवास वित्त कंपनी की जमाराशि स्वीकार करने की गतिविधियां राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा विनियमित की जाती हैं । तथापि, यह स्पष्' रूप से समझ लेना चाहिए कि राष्ट्रीय आवास बैंक आवास वित्त कंपनी की वित्तीय सुदृढ़ता के लिए या आवास वित्त कंपनी द्वारा किए गए किसी भी विवरण या अभ्यावेदन या उसके द्वारा व्यक्त की गई किसी भी राय की शुद्धता के लिए और आवास वित्त कंपनी द्वारा जमाराशि के प्रतिसंदाय/देनदारियों के निर्वहन के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं लेता है,

(च) उसी समूह की कंपनियों या अन्य हस्तियों या उन व्यापारिक उद्यमों जिनमें निदेशकगण और या आवास वित्त कंपनी पर्याप्त हित रखते है/रखती हैं, उन कंपनियों से और उनको दी गई निधि एवं गैर निधि आधारिक,दोनों प्रकार की कुल देय राशियों, सुविधाओं से देय कुल राशियों और उनसे तथा ऐसी हस्तियों का निवेश की कुल राशियों से संबंधित जानकारी,

(छ) आवेदन फार्म के अंत में, लेकिन जमाकर्ता के हस्ताक्षर से पहले जमाकर्ता द्वारा निम्नलिखित सत्यापन खंड जोड़ा जाएगा । "मैंने आवास वित्त कंपनी द्वारा प्रस्तुत किए गए वित्तीय और अन्य विवरणो /तथ्यों/अभ्यावेदनों को पढ़ लिया है और सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद मैं अपने जोखिम और इच्छा शक्ति पर आवास वित्त कंपनी के पास रकम जमा कर रहा हूं ।"

 

जमाकर्ताओं का परिचय

 

7. प्रत्येक आवास वित्त कंपनी नया खाता खोलने या जमा राशि स्वीकार करने से पहले नए जमाकर्ताओं से उचित परिचय प्राप्त करेगी और उस साक्ष्य को अपने अभिलेख में रखेगी जिसके आधार पर उस परिचय पर विश्वास किया गया ।

 

स्पष्'ाúकरण:

 

इस अनुच्छेद के प्रयोजनार्थ, परिचय से आशय प्रत्याशित जमाकर्ता की पहचान करना होगा और यह काम या तो किसी मौजूदा जमाकर्ता द्वारा या स्थायी खाता संख्या (पैन), चुनाव पहचान पत्र, पासपो'द या राशन कार्ड के आधार पर किया जा सकता है ।

जमाकर्ताओं को पावतियां देना

8. (1) यदि ऐसा पहले न किया गया हो तब प्रत्येक आवास वित्त कंपनी, प्रत्येक जमाकर्ता या उसके एजें' को प्रत्येक उस राशि, जिसे इन निर्देशों के प्रारम्भ होने की तारीख से पहले या बाद में निक्षेप के रूप में आवास वित्त कंपनी द्वारा स्वीकार किया जाए, की पावती देगी,

(2) इस निमित्त आवास वित्त कंपनी के लिए कार्य करने हेतु पात्र अधिकारी द्वारा उक्त पावती पर विधिवत् हस्ताक्षर किए जाने चाहिए और वह निक्षेप की तारीख, जमाकर्ता का नाम, जमा राशि के रूप में आवास वित्त कंपनी को प्राप्त हुई राशि का शब्दों और अंकों में कथन करेगा, उस पर देय ब्याज दर और उस तारीख को बताएगा, जिस तारीख को वह राशि प्रतिदेय होगी । परन्तु, यदि ऐसी प्राप्तियां किसी आवर्ती जमा की पहली किस्त के बाद की किस्तों से संबंधित हैं, तो उसमें केवल जमाकर्ता/ओं का नाम, तारीख और जमा राशि निहित होगी ।

निक्षेपों का रजिस्'र

9.(1) प्रत्येक आवास वित्त कंपनी एक या अधिक रजिस्'र रखेगी जिसमें प्रत्येक जमाकर्ता या संयुक्त जमाकर्ताओं के समूह के बारे में निम्नलिखित ब्योरे रखे जाएंगे -

(क) जमाकर्ता या संयुक्त जमाकर्ताओं के समूह, उनके नामितों के नाम व पते,

(ख) प्रत्येक निक्षेप की तारीख और राशि

(ग) प्रत्येक निक्षेप की अवधि और देय तारीख

(घ) प्रत्येक निक्षेप पर प्रोद्भाझत ब्याज और प्रीमियम की तारीख और राशि

(ङ) प्रत्येक पुनर्भुगतान की राशि व तारीख, चाहे मूलधन, प्रीमियम या ब्याज हो

(च) जमाकर्ता द्वारा किए गए दावे की तारीख

(छ) पुनर्भुगतान में पांच कार्य दिवसों से अधिक देरी होने के कारण

(ज) निक्षेपों से संबंधित कोई अन्य ब्योरे

 
 

(2) ऊपर उल्लिखित या एक अधिक रजिस्'र आवास वित्त कंपनी की प्रत्येक शाखा में जहां जमा खाता खोला गया, जमा खातों के बारे में रखे जाएंगे और आवास वित्त कंपनी के पंजीकृत कार्यालय में उसकी सभी शाखाओं का एक समेकित रजिस्'र बनाया जाएगा और उसे उस वित्त वर्ष जिसमें किसी जमा के पुनर्भुगतान या नवीनीकरण के बारे में सबसे बाद में इंदराज किया गया हो, और जिसके ब्योरे उस रजिस्'र में हों, की तारीख से कम से कम 8 वर्ष तक अच्छी हालत में रखा जाएगा ।

बशर्ते कि, यदि आवास वित्त कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 209 की उपधारा (1) में उल्लिखित लेखा बहियां उस उपधारा के प्रावधानों के अनुसार अपने पंजीकृत कार्यालय के अतिरिक्त किसी अन्य स्थान पर रखती है, तो यह उप अनुच्छेद का उपयुक्त अनुपालन होगा यदि पूर्वोक्त रजिस्'र ऐसे किसी अन्य स्थान पर रखे जाते हैं, बशर्ते कि वह आवास वित्त कंपनी कथित उपधारा के प्रावधानों के अन्तर्गत पंजीयक को भेजे नोि'स की एक प्रति, नोि'स भेजने की तारीख से 7 दिन के अंदर राष्ट्रीय आवास बैंक को भेजे ।

बोर्ड की रिपो'द में शामिल की जाने वाली सूचना

10.(1) इन निर्देशों के प्रारम्भ की तारीख के बाद कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 217 की उपधारा (1) के अन्तर्गत आवास वित्त कंपनी की सामान्य बैठक में रखी गई निदेशक बोर्ड की प्रत्येक रिपो'द में निम्नलिखित विवरण या सूचना शामिल की जाएगी अर्थात-

(क) आवास वित्त कंपनी के सार्वजनिक निक्षेप खातों की कुल संख्या जिनका जमाकर्ताओं द्वारा दावा नहीं किया जाता है या जिस तारीख को जमा राशि प्रतिसंदाय के लिए देय हुई, उस तारीख के बाद आवास वित्त कंपनी द्वारा उसका संदाय नहीं किया गया है,और

(ख) ऐसे खातों के अंतर्गत देय कुल राशियां, जिनका दावा नहीं किया गया है या पूर्वोक्तानुसार खंड (क) में उल्लिखित तारीखों के बाद संदाय नहीं किया गया है ।

(2) उपर्युक्त विवरण या सूचना उस वित्तीय वर्ष की अंतिम तारीख के अनुसार दी जाएगी जिससे वह रिपो'द संबंधित है और यदि पूर्ववर्ती उप पैराग्राफ के खंड (ख) में यथा उल्लिखित अदावी या असंवितरित राशि पांच लाख रुपए की कुल राशि से अधिक है तो जमाकर्ताओं या संयुक्त जमाकर्ताओं के समूह को देय राशि और अदावी या संवितरित बकाया राशि की वापसी अदायगी के लिए निदेशक बोर्ड द्वारा उठाए गए या प्रस्तावित कदमों के संबंध में एक विवरण भी रिपो'द में शामिल किया जाएगा ।

ब्याज दर तथा दलाली और अतिदेय सार्वजनिक निक्षेपों की अधिकतम सीमा

11.[1(क) 27 मार्च, 2003 को और इस तारीख से कोई भी आवास वित्त कंपनी ग्यारह प्रतिशत वार्षिक से अधिक ब्याज दर से कोई सार्वजनिक राशि आमंत्रित या स्वीकार या नवीनीकृत नहीं करेगी । ब्याज का भुगतान किया जा सकता है या ऐसे अंतराल पर संयोजित किया जा सकता है जो मासिक अंतराल से कम नहीं होगी ।

[1(कक) 20 सितम्बर, 2003 को और इस तारीख से कोई भी आवास वित्त कंपनी अधिसूचना सं. एफईएमए.5/2000-आरबी दिनांक 3 मई, 2003 के अनुसार अनिवासी भारतीयों से कोई भी प्रत्यावर्तनीय जमा राशियां अनिवासी (बाह्य) लेखा योजना के अधीन ऐसी दरों से अधिक दर, जो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ऐसी जमा राशियों पर, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए विनिर्दिष्' की है, पर आमंत्रित, स्वीकृत या नवीनीकृत नहीं करेगी ।

 

स्पष्'ाúकरण: जमा राशियों की अवधि एक वर्ष से कम और तीन वर्षों से अधिक नहीं होगी ।] 2

 

ख) कोई भी आवास वित्त कंपनी किसी दलाल को उसकी ओर से या उसके माध्यम से संग्रहित सार्वजनिक जमा राशि पर,

(i) दलाली,कमीशन,प्रोत्साहन राशि या किसी भी प्रकार की अन्य सुविधा इस प्रकार से संग्रहित जमा राशि के दो प्रतिशत से अधिक नहीं देगी,

(ii) उसकी ओर से प्रस्तुत किए गए संबंधित वाउचर/बिलों के आधार पर प्रतिपूर्ति के जरिए व्यय का, इस प्रकार से संग्रहित राशि के 0.50% से अधिक भुगतान नहीं करेगी ।] 1

 
 

(2) अतिदेय जमा राशि पर ब्याज का भुगतान कोई भी आवास वित्त कंपनी, अपने विवेक पर, अतिदेय सार्वजनिक जमाराशि पर या उक्त अतिदेय जमाराशि के किसी भाग पर, जमाराशि की परिपक्वता की तारीख से ब्याज की अनुमति दे सकती है, जो इस शर्त के अध्यधीन होगी कि :

(i) कुल अतिदेय जमाराशि या उसके किसी भाग का, इन निर्देशों के संबंधित उपबंधों के अनुसार, उसकी परिपक्वता की तारीख से किसी भावी तारीख तक नवीकरण किया जाता है, और

(ii) अनुज्ञेय ब्याज ऐसी अतिदेय जमाराशि की परिपक्वता की तारीख को लागू उचित दर पर होगा जो केवल इस प्रकार नवीकृत जमाराशि पर ही देय होगा : परंतु, जहां कोई आवास वित्त कंपनी जमाकर्ता द्वारा दावा किए जाने पर, परिपक्वता पर जमाराशि का ब्याज सहित प्रतिसंदाय करने में असफल रहती है, वहां आवास वित्त कंपनी दावा किए जाने की तारीख से प्रतिसंदाय करने की तारीख तक जमाराशि पर यथा लागू दर पर ब्याज का भुगतान करेगी ।

जमाराशियों की वापसी अदायगी के संबंध में सामान्य उपबंध

[12.(i) कोई भी आवास वित्त कंपनी किसी भी सार्वजनिक जमा राशि का पुनर्भुगतान उसकी स्वीकृति की तारीख से तीन माह के अंदर नहीं करेगी ।

(ii) जहां आवास वित्त कंपनी जमाकर्ता के अनुरोध पर, उपर्युक्त खंड (i) में बताई अवधि के बाद, किन्तु उसकी परिपक्वता से पूर्व, सार्वजनिक जमा राशियों का पुनर्भुगतान करती है, वहां कंपनी ब्याज का भुगतान निम्नलिखित दर से करेगी:

1. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.5/सीएमडी/2003 दिनांक 27 मार्च, 2003 द्वारा प्रतिस्थापित

2. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.6/सीएमडी/2003 दिनांक 20 सितम्बर, 2003 द्वारा सम्मिलित

 

(क) न्यूनतम अवरुद्धता अवधि

तीन माह

(ख) तीन माह के बाद किंतु छह माह से पूर्व

कोई ब्याज नहीं

(ग) 6 माह के बाद किंतुत परिपक्वता की तारीख से पूर्व

संदेय ब्याज उस ब्याज प्रतिशत से दो प्रतिशत कम होगी जो उस निर्दिष्'

अवधि के लिए देय है जिस ब्याज दर के लिए राशि जमा की गई या यदि

उस अवधि के लिए कोई ब्याज दर निर्दिष्' नहीं की गई है तब उस न्यूनतम

दर जिस पर आवास वित्त कंपनी द्वारा जमा राशियां स्वीकार की जाती हैं, से तीन प्रतिशत कम होगी ।

 

(i)आवास वित्त कंपनी सार्वजनिक जमा राशि पर संदेय ब्याज दर से, दो प्रतिशत बिंदु अधिक ब्याज दर पर सार्वजनिक जमा राशि की तारीख से तीन माह की समाप्ति के बाद जमाकर्ता को सार्वजनिक जमा राशि क ा 75% तक ऋण मंजूर कर सकती है ।

(ii)आवास वित्त कंपनी का यह दायित्व है कि वह जमा राशि की परिपक्वता से कम से कम दो माह पूर्व जमाकर्ता को जमा राशि की परिपक्वता का विवरण सूचित करे ।"

(iii)किसी एक मात्र जमाकर्ता/जिसका नाम प्रथम जमाकर्ता के रूप में आया है, के खाते में सामान्य रूप से जमा सभी राशियों को इकट्ठा किया जाएगा और परिपक्वता पूर्व पुनर्भुगतान के उद्देश्य से यथा एक जमा खाता माना जाएगा ।

 

(iv) किन्तु यह तब, जब किसी जमाकर्ता की मृत्यु की स्थिति में, सार्वजनिक जमा राशि उत्तरजीवी धारा के तहत संयुक्त धारिता के मामले में उत्तरजीवी जमाकर्ता(ओं) को या नामिती को या वैध वारिस को पुनर्भुगतान की तारीख तक संविदागत दर से ब्याज सहित दी जा सकती है ।

(v) इस उद्देश्य से, आवास वित्त कंपनियों को दो वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है, अर्थात एक समस्यामूलक आवास वित्त कंपनी और दूसरी सामान्य रूप से चलने वाली आवास वित्त कंपनी । आवास वित्त कंपनी जो सामान्य रूप से चलने वाली आवास वित्त कंपनी है, इस अधिसूचना की तारीख से, केवल अपने एक मात्र विवेक पर अवरुद्धता अवधि के बाद किसी सार्वजनिक जमा राशि के परिपक्वतापूव द पुनर्भुगतान की अनुज्ञा दे सकती है और जमाकर्ता समयपूर्व खाता बंद करने का आधिकारिक तौर पर दावा नहीं कर सकता है । समस्यामूलक आवास वित्त कंपनियों को किसी भी सार्वजनिक जमा राशि या जमाकर्ता की मृत्यु की स्थिति के अतिरिक्त, सार्वजनिक जमा राशियों के मुकाबले कोई ऋण मंजूर करने या कुल जमा 10,000/- रुपए तक की छो'ाú राशि के मामले में या 10,000/- रुपए तक के आपातकालीन व्यय को पूरा कर सकने के अतिरिक्त किसी जमाकर्ता को परिपक्वता पूर्व पुनर्भुगतान करने से वर्जित किया जाता है ।

समस्यामूलक आवास वित्त कंपनी वह है, जिसने -

(i) परिपक्व सार्वजनिक जमा राशि की विधि सम्मत मांग को पांच कार्य दिवसों में पूरी करने से इंकार कर दिया है या विफल रही है; या

(ii) सार्वजनिक जमा राशि या उसके किसी अंश के या उस पर किसी ब्याज के पुनर्भुगतान में किसी छो'ट जमाकर्ता के प्रति अपने व्यतिक्रम के बारे में कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 58एए के अधीन कंपनी विधि परिषद (लॉ बोर्ड) को सूचित किया है; या

(iii) अपनी जमा राशि के दायित्वों को पूरा करने के लिए अर्थ सुलभ आस्ति प्रतिभूतियों के आहरण हेतु बैंक से निवेदन करती है; या

(iv) सार्वजनिक जमा राशियों या अन्य दायित्वों को पूरा करने में व्यतिक्रम से बचने के लिए आवास वित्त कंपनी (रा.आ.बैंक) निर्देश, 2001 के या विवेक सम्मत मानदंडों के उपबंधों से किसी राहत या शिथिलता या छू' के लिए बैंक से निवेदन करती है; या

(v) जिसे रा.आ.बैंक ने या तो स्वत: प्रेरणा से, या सार्वजनिक जमा राशियों या देय राशियों का भुगतान नहीं करने के बारे में जमाकर्ताओं या कंपनी के ऋणदाताओं की शिकायत के आधार पर एक समस्यामूलक कंपनी के रूप में पहचान की है । ]1 परन्तु किसी जमाकर्ता की मृत्यु हो जाने की सूरत में उत्तरजीवी खंड के साथ संयुक्त धारिता के मामलों में उत्तरजीवी जमाकर्ता/ओं को या नामिती या कानूनी वारिस/सों को वापसी-अदायगी की तारीख तक संविदागत दर पर ब्याज सहित परिपक्वता की अवधि से सार्वजनिक निक्षेप का भुगतान किया जा सकता है ।

(iii)कोई आवास वित्त कंपनी, सार्वजनिक जमा पर देय ब्याज से दो प्रतिशत बिन्दु अधिक ब्याज दर पर सार्वजनिक जमा की तारीख से तीन माह की समाप्ति के पश्चात किसी जमाकर्ता को सार्वजनिक निक्षेप के पचहत्तर प्रतिशत तक ऋण मंजूर कर सकती है ।

परिपक्वता से पूर्व निक्षेपों का नवीनीकरण

 

13. जहां कोई आवास वित्त कंपनी किसी जमाकर्ता को उच्च ब्याज दर का लाभ प्राप्त करने के लिए परिपक्वता से पहले अपनी सार्वजनिक जमा राशि का नवीकरण करने की अनुमति देती है, वहां ऐसी कंपनी, जमाकर्ता को ब्याज दर में वृद्धि का भुगतान करेगी, बशर्ते कि

(i) सार्वजनिक जमा राशि का नवीकरण इन निर्देशों के अन्य उपबंधों के अनुसार और मूल संविदा की बाकी अवधि से लम्बी अवधि के लिए किया गया है और,

(ii) सार्वजनिक जमा राशि की समाप्त हुई अवधि का ब्याज, उस दर से एक प्रतिशत बिन्दु कम कर दिया गया है, जिस दर पर आवास वित्त कंपनी ने सामान्यतया भुगतान किया होता, यदि जमा राशि उस अवधि के लिए स्वीकार की गर्ह होती, जिस अवधि के लिए ऐसी जमा राशि इस्तेमाल की गई थी, पहले ऐसी घ'ाú हुई दर से अधिक भुगतान किया गया कोई भी ब्याज वसूल/समायोजित किया जाएगा ।

अनुमोदित प्रतिभूतियों की सुरक्षित अभिरक्षा

14. (1) प्रत्येक आवास वित्त कंपनी द्वारा, राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 की धारा 29ख के अनुसार विल्लंगमरहित प्रतिभूतियों को रखना आवश्यक है । इस संबंध में आवास वित्त कंपनी, जहां उसका पंजीकृत कार्यालय है, वहां इस आश्य से इसके द्वारा नामित किसी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक को इसका उत्तरदायित्व सौंपेगी ।

2. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.9/सीएमडी/2005 दिनांक 10 जनवरी, 2005 द्वारा सम्मिलित

[किन्तु यह कि जहां कोई आवास वित्त कंपनी इन प्रतिभूतियों को भारतीय स्'ाणक धारिता निगम या उसके अभिहित बैंकर को उस स्थान से किसी दूसरे स्थान, जहां उसका पंजीकृत कार्यालय स्थित है, पर सौंपना चाहती है या उन्हें किसी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक में या भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड में पंजीकृत निक्षेपागार में भागीदार के साथ घ'क के सहायक सामान्य खाता बही लेखा के रूप में रखना चाहती है, वहां यह कंपनी राष्ट्रीय आवास बैंक से, लिखित में, पूर्व अनुमोदन प्राप्त करेगी ।]1

[(2) उपर्युक्त उपनुच्छेद में उल्लिखित प्रतिभूतियां ऐसे अभिहित बैंकर को या भारतीय स्'ाणक धारिता निगम लि. को या निक्षेपागार में भागीदार का ट सौंपी जाती रहेंगी या जमाकर्ताओं के लाभार्थ अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक में घ'क के सहायक सामान्य खाता बही लेखा में रखी जाती रहेंगी और आहरित या नकदीकृत नहीं की जाएंगी या अन्यथा जमाकर्ताओं को पुनर्भुगतान के अतिरिक्त, आवास वित्त कंपनी की ओर से उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी ।]2

किन्तु यह तब जबकि,

(1) कोई भी आवास वित्त कंपनी ऐसी प्रतिभूतियों के एक भाग को निकालने की हकदार होगी । प्रतिभूतियों का यह निकाले जाने वाला भाग उसकी जमाराशि में कमी के यथा अनुपात और उसके लेखा परीक्षकों से इस दिशा में विधिवत अनुप्रमाणित होना चाहिए,

(2) जहां आवास वित्त कंपनी ऐसी प्रतिभूतियों को प्रतिस्थापित करना चाहती है, तो वह ऐसे आहरण से पूर्व अभिहित बैंक को समान मूल्य की प्रतिस्थापन्न प्रतिभूति सौंप कर ऐसा कर सकती हैं ।

स्पष्'ाúकरण

"अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक" से 1934 के भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 (1934 का 2) की द्वितीय अनुसूची में शामिल किसी बैंक से है किन्तु कोई भी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक या सहकारी बैंक इसमें शामिल नहीं हैं ।

कर्मचारी प्रतिभूति जमा

15. अपने सामान्य कारोबार के दौरान, अपने किसी भी कर्मचारी से, उसके कर्तव्यों के उचित निष्पादन के लिए, प्रतिभूति जमा के रूप में कोई भी राशि प्राप्त करने वाली आवास वित्त कंपनी उस राशि को किसी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक में या डाक घर में कर्मचारी और आवास वित्त कंपनी के संयुक्त नाम वाले खाते में इस शर्त पर रखेगी कि -

(1) वह कर्मचारी की लिखित सहमति के बिना राशि नहीं निकालेगी, और

(2) यह राशि कर्मचारी को ऐसे जमा खाते पर देय ब्याज सहित प्रतिदेय होगी, बशर्ते कि इस या उसके किसी भाग का कर्मचारी की ओर से उसके कर्तव्यों के उचित निष्पादन में असफल रहने के कारण आवास वित्त कंपनी द्वारा विनियोजन न किया जाना हो ।

विज्ञापन और विज्ञापन के बदले विवरण

16. सार्वजनिक जमा राशियां स्वीकार करने वाली प्रत्येक आवास वित्त कंपनी, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी और विविध गैर-बैंकिंग कंपनी (विज्ञापन) नियम, 1977 के उपबंधों का अनुपालन करेगी और उसके तहत जारी किए जाने वाले प्रत्येक विज्ञापन में निम्नलिखित भी विनिर्दिष्' करेगी:

1. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.3/सीएमडी/2002 दिनांक 27 दिसम्बर, 2002 के अनुच्छेद 5(1) द्वारा प्रतिस्थापित (18.01.2003 से प्रभावी)

2. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.3/सीएमडी/2002 दिनांक 27 दिसम्बर, 2002 के अनुच्छेद 5(2) द्वारा प्रतिस्थापित (18.01.2003 से प्रभावी)

(क) जमाकर्ता को ब्याज, प्रीमियम ,बोनस या अन्य लाभ के रूप में प्रतिफल की वास्तविक दर

(ख) जमाकर्ता को भुगतान करने का ढंग

(ग) जमा राशियों की परिपक्वता अवधि

(घ) किसी विनिर्दिष्' जमा राशि पर देय ब्याज

(ङ) यदि कोई जमाकर्ता, परिपक्वता से पहले जमा राशियां निकालता है तब जमाकर्ता को दिए जाने वाली ब्याज की दर

(च) वे शर्तें निबंधन जिनके अध्यधीन किसी जमा राशि का नवीकरण किया जाएगा, और

(छ) उन शर्तों और निबंधनों से संबंधित अन्य विशेष बातें जिनके अध्यधीन जमा राशियां स्वीकार की जाती हैं/उनका नवीकरण किया जाता है

(ज) उसी समूह की कंपनियों या अन्य हस्तियों या व्यापारी उद्यमों जिनमें निदेशकों और या आवास वित्त कंपनी पर्याप्त हित रखती है, से (उसको प्रदत्त गैर निधि आधारिक सुविधाओं सहित) कुल देय राशियों तथा ऐसी हस्तियों के निवेश की कुल राशि से संबंधित सूचना ।

(2)जहां कोई आवास वित्त कंपनी, सार्वजनिक जमाराशियां आमंत्रित करने के लिए किसी व्यक्ति को आमंत्रित किए बिना या उसे अनुमति दिए बिना या उसे इसका निमित्त बनाए बिना जमाराशियां स्वीकार करना चाहती है, वहां यह ऐसी जमाराशियां स्वीकार करने से पहले वह राष्ट्रीय आवास बैंक के नई दिल्ली कार्यालय में पंजीकरण के लिए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी और विविध गैर-बैंकिंग कंपनी (विज्ञापन) नियम, 1977 के अनुसरण में विज्ञापन में शामिल किए जाने के लिए अपेक्षित सभी विवरणों के विज्ञापन के बदले में एक विवरण प्रस्तुत करेगी और यहां उपर्युक्त उप पैराग्राफ (1) में उल्लिखित विवरण, जो पूर्वोक्त नियमों में बताए गए ढंग से विधिवत हस्ताक्षरित हो ।

(3)उप-पैराग्राफ(2) के तहत दिया गया विवरण उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 6 माह पूरे होने तक वैध होगा जिसमें उसे दिया गया है या उस तारीख तक जब तक कि आवास वित्त कंपनी की सामान्य बैठक में तुलन पत्र प्रस्तुत नहीं कर दिए जाते या जहां किसी वर्ष की वार्षिक आम बैठक नहीं हुई है वहां कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के उपबंधों के अनुसार वह अद्यतन तारीख, जिस तारीख तक बैठक हो जानी चाहिए, इनमें से जोभी पहले हो और उस वित्तीय वर्ष में जमाराशियां स्वीकार करने से पहले प्रत्येक अगले वित्तीय वर्ष में नया विवरण दिया जाएगा ।

शाखाएं खोलना

17. कोई भी आवास वित्त कंपनी, शाखा या कार्यालय खोलने से पहले, शाखा या कार्यालय खोलने के अपने इरादे के बारे में, लिखित में, राष्ट्रीय आवास बैंक को सूचित करेगी ।

शाखाएं बंद करना

18. निक्षेप स्वीकार करने वाली कोई भी आवास वित्त कंपनी अपनी शाखा/कार्यालय को बंद करने के अपने प्रस्ताव के बारे में 90 दिन पहले राष्ट्रीय आवास बैंक को सूचित किए बिना तथा राष्ट्रीय स्तर के किसी एक समाचार पत्र में और उस स्थान पर प्रसारित किसी एक स्थानीय समाचार पत्र में इस आशय की विज्ञप्ति दिए बिना शाखा/कार्यालय बंद नहीं करेगी ।

आय अभिज्ञान

 
अध्याय III - विवेक सम्मत मानदंड
 

आय अभिज्ञान

19. (1) आय अभिज्ञान मान्यता प्राप्त लेखांकन के सिद्धान्तों पर आधारित होगा ।

(2)ब्याज ब'थ'ा या अनुपयोज्य आस्तियों पर अन्य प्रभारों सहित आय का अभिज्ञान केवल तभी किया जाएगा जब ये वास्तव में वसूल हो जाती हैं । आस्ति में अनुपयोज्य हो जाने और वसूली नहीं होने से पूर्व ऐसी कोई भी आय वापिस की जाएगी ।

(3)किराया खरीद आस्तियों के संबंध में, जहां किस्तें 12 माह से अधिक के लिए अतिदेय हैं, वहां आय का अभिज्ञान केवल तभी किया जाएगा जब किराया प्रभार वास्तव में प्राप्त हो जाते हैं । आस्ति के अनुपयोज्य हो जाने और वसूल नहीं होने से पूर्व लाभ एवं हानि लेखा में जमा करने के लिए ली गई ऐसी किसी अन्य आय को वापिस किया जाएगा ।

(4)पट्टा आस्तियों के बारे में, जहां पट्टा किराए 12 माह से अधिक के लिए अतिदेय होता है वहां आय का अभिज्ञान केवल तभी किया जाएगा जबकि पट्टा किराया वास्तव में प्राप्त हो जाता है । आस्ति अनुपयोज्य हो जाने एवं वसूल नहीं होने से पूर्व लाभ एवं हानि लेखा में जमा करने को लिए निवल पट्टा वापिस किया जाएगा ।

स्पष्'ाúकरण : इस अनुच्छेद के प्रयोजनार्थ, निवल पट्टा किराये का अर्थ सकल पट्टा किराया होता है जो लाभ-हानि लेखा में नामे डाले गए/जमा किए गए पट्टा समायोजन लेखा से समायोजित किया जाता है और जिसमें से कंपनी अधिनियम, 1956 की अनुसूची XIV के अधीन लागू दर से अवक्षयण घ'ा दिया जाता है ।

 

निवेश से आय

20.(1) निगमित निकायों एवं म्युचुअल फंड की यूनि'ाटं पर लाभांश से हुई आय को नकदी आधार पर लेखा में लिया जाएगा । किन्तु यह तब जबकि, निगमित निकायों के शेयरों पर लाभांश से हुई आय को तब प्रोद्भावन आधार पर लेखा में लिया जाए जब ऐसी लाभांश निगमित निकाय द्वारा अपनी साधारण बैठक में घोषित किया जाता है और भुगतान प्राप्त करने का आवास वित्त कंपनी का अधिकार स्थापित हो जाता है ।

(2)निगमित निकायों के बंधपत्रों/ऋण पत्रों से तथा सरकार की प्रतिभूतियों/बंधपत्रों से आय को प्रोद्भावन आधार पर लेखा में लिया जाएगा । किंतु यह जब, जबकि इन लिखतों पर ब्याज की दर पूर्व अवधारित होती है तथा ब्याज नियमित रूप में प्राप्त होता है और बकाया राशि में नहीं रहता है ।

(3)निगमित निकायों या सार्वजनिक उपक्रमों की प्रतिभूतियों, जिसके ब्याज का भुगतान एवं मूलधन की गारं'ाú केन्द्र सरकार या किसी राज्य सरकार ने दे रखी है, पर आय को प्रोदभवन के आधार पर लेखा में लिया जाए ।

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लेखांकन मानक

21. भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (जिसे इन निर्देशों में यथा भा.सं.ले.सं. निर्दिष्' किया गया है) की ओर से जारी लेखांकन मानक एवं दिशा-

निर्देश संबंधी ि'प्पणियें का वहां तक पालन किया जाएगा, जहां वे इन निर्देशों से असंगत नहीं हैं ।

निवेश हेतु लेखांकन

22. [(1) (क) प्रत्येक आवास वित्त कंपनी का निदेशक मंडल कंपनी के लिए निवेश नीति तैयार करेगी और उसे क्रियान्वित करेगी,

(ख) निवेशों को चालू एवं दीर्घकालीन निवेशों में वर्गीकृत करने के मानदंडों की कंपनी के बोर्ड द्वारा निवेश नीति में व्याख्या दी जाएगी,

(ग) प्रतिभूतियों में निवेशों को प्रत्येक निवेश के समय चालू एवं दीर्घकालीन में वर्गीकृत किया जाएगा,

(घ) (i) तदर्थ आधार पर अन्त: वर्ग में अंतरण नहीं किया जाएगा,

 

(ii)अंत: वर्ग अंतरण, यदि आवश्यक हो, बोर्ड के अनुमोदन से प्रत्येक छमाही अर्थात 1 अप्रैल या 1 अक्तूबर को किया जाएगा,

(iii)निवेशों को चालू से दीर्घकालीन या दीर्घकालीन से चालू में स्क्रिप के अनुसार बही मूल्य या बाजार मूल्य पर, जो भी कम हो, अंतरित किया जाएगा,

(iv)प्रत्येक स्क्रिप में अवक्षयण, यदि हो, पूरा दिया जाएगा और अधिमूल्यन, यदि हो, को छोड़ दिया जाएगा,

(v)किसी एक स्क्रिप का अवक्षयण, ऐसे अंत: वर्ग अंतरण के समय किसी दूसरे स्क्रिप के अधिमूल्यन में नहीं डाला जाएगा चाहे स्क्रिप समान वर्ग का हो "।]1

 

(2)कोई दीर्घावधि निवेश का मूल्य भा.सं.ले.सं. द्वारा जारी लेखांकन मानक के अनुसार लगाया जाएगा ।

(3)उद्धृत वर्तमान निवेश के मूल्यांकन के प्रयोजन से, निम्नलिखित श्रेणियों में समूहबद्ध किया जाएगा, जैसे

(क) साम्य शेयर

(ख) अधिमान शेयर

(ग) ऋणपत्र एवं बंधपत्र

(घ) राजकोष के बिलों सहित सरकारी प्रतिभूतियां

(ङ) म्युचुअल फंड की यूनि'टं, एवं

(च) अन्य

1. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.8/सीएमडी/2004 दिनांक 18 मई, 2004 के अनुच्छेद 1 द्वारा प्रतिस्थापित (29.05.2004 से प्रभावी)

प्रत्येक श्रेणी के लिए उद्धृत वर्तमान निवेशों, का मूल्य लागत या बाजार मूल्य में से जो अल्पतर है, पर लगाया जाएगा । इन प्रयोजनार्थ, श्रेणी के निवेश

को प्रतिभूति, तथा लागत एवं बाजार मूल्य क्रम से माना जाएगा और यह सभी श्रेणियों के निवेशों का योग होगा । यदि किसी श्रेणी के लिए कुल बाजार

मूल्य उस श्रेणी की कुल लागत से कम होता है तब निवल अवक्षयण प्रदान किया जाएगा या लाभ-हानि लेखा में प्रभारित किया जाएगा । यदि किसी श्रेणी के लिए कुल बाजार मूल्य

उस श्रेणी के लिए कुल लागत से अधिक हो जाता है, तब निवल अवक्षयण की उपेक्षा कर दी जाएगी । निवेशों की एक ही श्रेणी में अवक्षयण को किसी अन्य श्रेणी में

अधिमूल्यन के लिए मुजरा नहीं किया जाएगा ।

[(4) चालू निवेशों की प्रकृति के अनुद्धृत साम्य शेयरों का मूल्यंन लागत या ब्रेक अप मूल्य पर, जो भी कम हो, किया जाएगा । जब निवेशी कंपनी का

पिछले दो वर्ष का तुलन-पत्र उपलब्ध न हो तो ऐसे शेयरों का मूल्य एक रुपया प्रति कंपनी लगाया जाएगा

[(5) वर्तमान निवेशों की प्रकृति में अनुधृत अधिमान शेयरों का मूल्य लागत या अंकित मूल्य निवल आस्ति मूल्य में से जो भी कम है, पर लगाया

जाएगा । यदि निवल आस्ति मूल्य नगण्य है या निवेशी कंपनी का पिछले दो वर्ष का तुलन-पत्र उपलब्ध नहीं है तब इसका मूल्य एक रुपया प्रति कंपनी

लगाया जाए ।]2

(6) उद्धृत नहीं की गई सरकारी प्रतिभूतियों या सरकारी गारं'ाúकृत बंधपत्राकं में निवेश का मूल्य वहनीय लागत पर किया जाएगा ।

(7) वर्तमान निवेशों की प्रकृति में, म्युचुअल फंड की यूनि'ाटं में उद्धृत नहीं किए गए निवेश का मूल्य प्रत्येक योजना विशेष के संबंध में म्युचुअल फंड

द्वारा घोषित निवल आस्ति मूल्य पर लगाया जाएगा ।

(8) वाणिज्यिक पत्रों का मूल्य वहनीय लागत पर किया जाएगा ।

ि'प्पणी:

उद्धृत नहीं किए गए ऋण पत्रों को उनकी अवधि अनुसार, आय अभिज्ञान एवं आस्ति वर्गीकरण के प्रयोजन के लिए ये दीर्घावधि ऋण या ऋण सुविधाओं

के अन्य प्रकार के रूप में माना जाएगा ।

[मांग/शीघ्रावधि ऋणों पर नीति की जरूरत

22क. (1) मांग/शीघ्रावधि ऋण प्रदान कर रही/करने की इच्छुक प्रत्येक आवास वित्त कंपनी का निदेशक मंडल कंपनी के लिए एक नीति तैयार करेगा और उसे क्रियान्वित करेगा,-

(3) ऐसी नीति में, अन्यों के साथ-साथ, निम्नलिखित अनुबद्ध होगा -

    (i) एक निर्दिष्' तारीख, जिसके भीतर मांग या शीघ्रावधि ऋणों के पुनर्भुगतान की मांग की जाएगी या उसके लिए कहा जाएगा,

    (ii) संस्वीकृति प्राधिकारी मांग या शीघ्रावधि ऋण को संस्वीकार करते समय,लिखित में विनिर्दिष्' कारणों का अभिलेख करेगा, यदि ऐसे ऋण

    के लिए मांगने की या उसके लिए कहने की विनिर्दिष्' तारीख संस्वीकृति की तारीख से एक वर्ष की अवधि से परे की अनुबद्ध की जाती है,

    • 1. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.8/सीएमडी/2004 दिनांक 18 मई, 2004 के अनुच्छेद 2 द्वारा प्रतिस्थापित (29.05.2004 से प्रभावी)

      2. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.8/सीएमडी/2004 दिनांक 18 मई, 2004 के अनुच्छेद 1 द्वारा प्रतिस्थापित (29.05.2004 से प्रभावी)

    • (iii) ब्याज की दर, जो ऐसे ऋणों पर संदेय होगी,

    • (v) संस्वीकृति प्राधिकारी, मांग या शीघ्रावधि को संस्वीकार करते समय, लिखित में, विनिर्दिष्' कारण्ंााटं का अभिलेख करेगा, यदि कोई ब्याज

      अनुबद्ध नहीं है या किसी भी अवधि के लिए कोई ऋण स्थगन प्रदान किया जाता है,

      (vi) ऋण के निष्पादन के पुनरीक्षण के लिए कोई निर्दिष्' तारीख संस्वीकृति की तारीख से प्रारम्भ होकर 6 माह से अधिक नहीं होगी,

      (vii) ऐसे मांग या शीघ्रावधि ऋणों का तब तक नवीनीकरण नहीं किया जाएगा, जब तक आवधिक पुनरीक्षण संस्वीकृति की शर्तों का अनुपालन

      संतोषजनक नहीं दर्शाता है ।]1

आस्ति वर्गीकरण

2

23.(1) प्रत्येक आवास वित्त कंपनी भलीभांति परिभाषित ऋण संबंधी कमजोरियों को और वसूली के लिए समर्थक प्रतिभूति पर कितनी निर्भरता

है, उसको हिसाब में लेने के बाद, पट्टा/किराया खरीद की अपनी आस्तियों, ऋणों एवं अग्रिमों तथा ऋण के अन्य रूपों को निम्न लिखित श्रेणियों में वर्गीकृत करेगी :-

(i) मानक आस्तियां

(ii) उप मानक आस्तियां

(iii) संदिग्ध आस्तियां

(iv) हानिप्रद आस्तियां

 

(2) ऊपर निर्दिष्' किए गए आस्तियों के वर्ग को तब तक पुननिर्धारण के एक परिणाम के रूप में समुन्नत नहीं किया जाएगा, जबतक कि यह उन्नयन के

लिए अपेक्षित शर्तों को पूरी नहीं करता है ।

 

प्रावधान संबंधी अपेक्षाएं

 

24. प्रत्येक आवास वित्त कंपनी, किसी लेखा का अनुपयोज्य बन जाने, इस रूप में, उसके अभिज्ञान के बीच समयांत्तर, प्रतिभूति की वसूली तथा

प्रभारित प्रतिभूति के मूल्य में समयोपरि कमी को लेखा में लेने के बाद, उपमानक आस्तियों, संदिग्ध आस्तियों एवं हानिप्रद आस्तियों के लिए यथा निम्नलिखित प्रावधान करेगी :-

खरीदे गए एवं भुनाए गए बिलों सहित, ऋणों अग्रिमों एवं अन्य ऋण सुविधाओं एवं भुनाए गए बिलों सहित, ऋणों अग्रिमों एवं अन्य ऋण सुविधाएं

(1) खरीदे गए एवं भुनाए गए बिलों सहित, ऋणों अग्रिमों एवं अन्य ऋण सुविधाओं के लिए प्रावधान संबंधी अपेक्षाएं यथा निम्न होगी:

i) हानिप्रद आस्तियां समस्त आस्तियों को बट्टे खाते डाल दिया जाएगा । यदि आस्तियों को किसी भी कारण से लेखा बहियों में रहने दिया जाता है, तब 100

प्रतिशत बकाया के लिए प्रावधान किया जाना चाहिए ।

1.अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.3/सीएमडी/2002 दिनांक 27.12 2002 के अनुच्छेद 6 द्वारा प्रतिस्थापित (18.1.2003 से प्रभावी)

 
 

ii) संदिग्ध आस्तियां (क) उतने तक 100 प्रतिशत प्रावधान किया जाएगा जितने तक अग्रिम उस प्रतिभूति के वसूली योग्य मूल्य में नहीं आ जाता

जिसके लिए आवास वित्त कंपनी के पास वैध संसाधन है । वसूली योग्य मूल्य का अनुमान यथार्थ आधार पर किया जाएगा ।

 

(ख) उपर्युक्त मद (क) के अतिरिक्त, उस अवधि जिसमें आस्ति संदिग्ध रही है, पर निर्भर करते हुए प्रतिभूति अंश (अर्थात बकाया राशियों के अनुमानित वसूली योग्य

मूल्य) के 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक के लिए प्रावधान निम्नलिखित आधार पर किया जाएगा ।

जिस अवधि में आस्ति प्रावधान का प्रतिशत यथा संदिग्ध मानी गई

एक वर्ष तक 20

एक से तीन वर्ष तक 30

तीन वर्ष से अधिक 50

iii) उप-मानक आस्तियां कुल बकाया के 10 प्रतिशत का एक सामान्य प्रावधान किया जाना चाहिए ।

पट्टा एवं किराया खरीद की आस्तियां

  • (2) किराया खरीद एवं पट्टाकृत आस्तियों के लिए प्रावधान संबंधी अपेक्षाएं यथा निम्न होंगी :-

    किराया खरीद की आस्तियां

    (i) किराया खरीद आस्तियें के संबंध में, (अतिदेय तथा भावी किस्तों को एक साथ मिलाकर) कुल देय राशि, जिसमें से लाभ एवं हानि लेखा में

    जमा नहीं किए गए और अपरिपक्व वित्त प्रभारों के रूप में यथा अग्रनीत, वित्त प्रभारों तथा पूर्वता प्राप्त आस्तियों के अवक्षयित मूल्य को घ'ाकर प्रावधान किया जाएगा ।

    स्पष्'ाúकरण

    इस प्रयोजन से, आस्ति का अवक्षयित मूल्य अनुमान से संगणित किया जाएगा, क्योंकि आस्ति की मूल लागत में से अवक्षयण 20 प्रतिशत वार्षिक की

    दर से, एक सीधी रेखा पद्धति में कम कर दिया जाएगा । प्रयोग में आ चुकी आस्तियों के संबंध में, मूल लागत ऐसी प्रयुक्त आस्तियों को अर्जित

    करने में उपगत वास्तविक लागत होगी ।

    किराया खरीद एवं पट्टाकृत आस्तियों के लिए अतिरिक्त प्रावधन

    (ii) किराया खरीद एवं पट्टाकृत आस्तियों के संबंध में अतिरिक्त प्रावधान निम्न प्रकार से किया जाएगा :

 
 

(क)जहां किराया प्रभारों या पट्टा किराए की कोई राशि 12 माह तक अतिदेय रहती है शून्य

(ख)जहां किराया प्रभारों या पट्टा किराए की कोई राशि 12 माह से अधिक किन्तु 24 माह तक अतिदेय रहती है निवल बही मूल्य का 10 प्रतिशत

(ग)जहां किराया प्रभारों या पट्टा किराए की कोई राशि 24 माह से अधिक किन्तु 36 माह तक अतिदेय रहती है निवल बही मूल्य का 40 प्रतिशत

(घ)जहां किराया प्रभारों या पट्टा किराए की कोई राशि 36 माह से अधिक किन्तु 48 माह तक अतिदेय रहती है निवल बही मूल्य का 70 प्रतिशत

(ड)जहां किराया प्रभारों या पट्टा किराए की कोई राशि 48 माह से अधिक के लिए अतिदेय रहती है निवल बही मूल्य का 100 प्रतिशत

 
 

(iii)किराया खरीद पट्टाकृत आस्तियों की अंतिम किस्त की देय तारीख के बाद 12 माह की अवधि समाप्त हो जाने पर, संपूर्ण निवल बही

मूल्य के लिए पूर्णत: प्रावधान किया जाएगा ।

ि'प्पणियां

(1) किराया खरीद करार के अनुसरण में, उधारकर्ता आवास वित्त क ंपनी के पास रखी गई अवधान राशि मार्जिन राशि प्रतिभूति की राशि को

उपर्युक्त खंड (i) के अधीन निर्धारित प्रावधानों के लिए का' ली जाए, यदि करार में मासिक किस्तों को समान बनाते समय पहले से ही

हिसाब में नहीं ली गई हैं । किराया खरीद करार के अनुसरण में उपलब्ध अन्य किसी प्रतिभूति मूल्य की क'ाठती केवल उपर्युक्त खंड (ii) में

निर्धारित प्रावधानों के लिए ही की जाए ।

(2) पट्टा करार के अनुसरण में उपलब्ध किसी अन्य प्रतिभूति मूल्य के साथ पट्टा करार के ही अनुसरण में उधारकर्ता द्वारा आवास वित्त क ंपनी

के पास रखी गई प्रतिभूति की राशि की क'ाठती केवल उपर्युक्त खंड (ii) में निर्धारित प्रावधानों के लिए ही की जाए ।

(3)यह स्पष्' किया जाता है कि अनुपयोज्य आस्तियों पर आय अभिज्ञान एवं उनके लिए प्रावधान किया जाना, विवेक सम्मत मानदंडों के दो भिन्न प्रश्न

हैं तथा मानदंडों के अनुसार प्रावधान, पट्टा समायोजन लेखा में, यदि कोई शेष राशि होती है, तब उसे समायोजित करने के बाद, संदर्भाधीन पट्टाकृत आस्ति

के अवक्षयित बही मूल्य सहित अनुपयोज्य आस्तियों की कुल बकाया शेष राशियों पर प्रावधान करना आवश्यक होता है । इस तथ्य, कि अनुपयोज्य

आस्तियों पर आय का अभिज्ञान नहीं किया गया है, को प्रावधान नहीं करने का कारण नहीं माना जा सकता है ।

(4)इन निर्देशों के अनुच्छेद 2(1)(र) में यथा निर्दिष्' कोई आस्ति, जिस पर पुन: बातचीत हो चुकी है या पुननिर्धारित की जा चुकी है, यह एक उप मानक

आस्ति होगी या उसी वर्ग में बनी रहेगी जिसमें वह यथा स्थिति, एक संदिग्ध आस्ति या एक हानिप्रद आस्ति के रूप में पुन: बातचीत करके तय करने या

पुर्निर्धारित करने से पूर्व थी । ऐसी आस्ति के लिए यथा लागू आवश्यक प्रावधान तब तक करना अपेक्षित है, जब तक इसे समुन्नत नहीं किया जाता है । जहा

ं किसी आस्ति को, ऐसी प्राकृतिक आपदाओं जिन्हें उधारकर्ता की पुनर्भुगतान क्षमता को क्षीण कर दिया है, के कारण पुनर्निर्धारित किया गया है, जैसा

अनुच्छेद 2(1)(र) के द्वितीय परंतुक में दिया गया है, वहां ऐसे पुनर्निर्धारण से पूर्व किया गया कोई प्रावधान न तो पुनरांकित किया जाएगा, न तो

प्रावधान संबंधी ऐसी अपेक्षाओं के लिए समायोजित किया जाएगा जोकि भविष्य में उत्पन्न हो सकती है ।

[(5) 01 अप्रैल, 2002 को या उसके बाद लिखे गए सभी वित्तीय पट्टों के लिए प्रावधान संबंधी अपेक्षाएं आवश्यक हैं, जैसाकि किराया आस्तियों पर लागू होती हैं ।]1

तुलन-पत्र में प्रक'ाúकरण

 
 

26. (1) प्रत्येक आवास वित्त कंपनी ि'यर-। एवं ि'यर-।। पूंजी का एक न्यूनतम पूंजी अनुपात रखेगी जो निम्नलिखित से कम नहीं होगा -

i) 31 मार्च, 2001 को या इससे पूर्व 10 प्रतिशत और

ii) बारह प्रतिशत [31 मार्च, 2001 को या उससे पहले और उसके बाद,]1

उपर्युक्त प्रतिशत उसकी कुल जोखिम भारित आस्तियों का और तुलनपत्र बाह्य मदों के जोखिम समायोजित मूल्य का होगा

(2)किसी भी समय कुल ि'यर-।। पूंजी ि'यर-। पूंजी के 100 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी ।

स्पष्'ाúकरण

तुलन-पत्र की आस्तियों पर

(1) इन निर्देशों में प्रतिशत भार के रूप में अभिव्यक्त ऋण जोखिम की मात्रा तुलनपत्र की आस्तियों को समनुदेशित की गई है । इसलिए, प्रत्येक

आस्ति/मद के मूल्य को आस्तियों का जोखिम समायोजित मूल्य निकालने के लिए सुसंगत जोखिम भारों से गुणा किया जाना अपेक्षित है । कुल

योग को न्यूनतम पूंजी अनुपात की गणना करने के लिए हिसाब में लिया जाएगा । जोखिम भारित आस्तियों को यथा निधिकृत मदों के भारित कुल

योग परिकलित किया जाएगा, जिसका विवरण नीचे दिया जाता है:-

1. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.3/सीएमडी/2002 दिनांक 27 दिसम्बर, 2002 के अनुच्छेद 7

द्वारा सम्मिलित (18.1.2003 से प्रभावी)

2. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.3/सीएमडी/2002 दिनांक 27 दिसम्बर, 2002 के अनुच्छेद 8

द्वारा सम्मिलित

भारित आस्तियों अर्थात तुलन-पत्र की मदें प्रतिशत भार

(1) सावध्ंिा जमा राशियों और बैंकों के पास जमा राशियां के प्रमाण-पत्रों सहित नकदी

और बैंक शेष राशियां 0

(2) निवेश

(क) राष्ट्रीय आवास बैंक अध्ंिानियम, 1987 में परिभाषित अनुमोदित प्रतिभूतियां 0

(ख) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बंधपत्र एवं जमाराशियां/जमाराशि प्रमाण-पत्र/सार्वजनिक

वित्तीय संस्थानों के बंधपत्र 20

(ग) यूनि' 'ïस्' आफ इंडिया की यूनि'टं 20

[(गक) आवासीय अंचल संपत्ति क ट बंधक से प्रतिभूत और राष्ट्रीय आवास बैंक या किसी 50

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक की ओर से मान्यताप्राप्त एवं पर्यवेक्षित किसी आवास

वित्त कंपनी द्वारा प्रवर्तित प्राप्य राशि या किसी ऋण में एक अविभाजित अधिकार,

स्वामित्व या हित का किसी आवास वित्त कंपनी द्वारा क्रय या अधिग्रहण के प्रमाण स्वरूप

बंधक समर्थित प्रतिभूति, प्राप्ति या अन्य प्रतिभूति, बशर्ते कि नीचे नो' (4) में

विनिर्दिष्' शर्तें पूरी की जाती हैं ।]1

(घ) सभी कंपनियों के शेयरों में उपरोक्त (ख) में उल्लेख रहित कंपनियों के डिबेंचर/बांड एवं वाणिज्यिक

पत्र एवं उपरोक्त (ग) के अतिरिक्त अन्य म्युचुअल फंड यूनि'टं 100

(3) क) केन्द्र सरकार/राज्य सरकारों की ओर से गारं'ाúकृत आवास/परियोजना ऋण जोखिम भार

0

ि'प्पणी : जहां गारं'ाú का अवलम्बन लिया गया है, और संबंधित सरकार

गारं'ाú के अवलम्बन के बाद 90 दिनों से अधिक की अवधि में व्यतिक्रमी रह

रही है, वहां 100% का जोखिम भार समनुदेशित किया जाए ।

ख) (व्यक्तियों को ऐसी अचल सम्पत्तियों जिन्हें यथा मानक आस्तियां वर्गीकृत 50

किया है, के बंधक से प्रतिभूत आवास ऋण)

ग) अन्य आवास ऋण 100]2

 

1. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.3/सीएमडी/2002 दिनांक 27.12.2002 के अनुच्छेद 9(1)द्वारा सम्मिलित

2. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.9/सीएमडी/2005 दिनांक 10.1.2005 द्वारा प्रतिस्थापित

 
 

4. चालू आस्तियां

(क) किराए पर स्'ाक (कृपया अगले पृष्ठ पर ि'प्पणी 2 देखें) 100

(ख) अंतर निगमित ऋण/जमा राशियां 100

(ग) कंपनी की अपनी जमाराशियों द्वारा पूर्णत: जमानती ऋण एवं अग्रिम 0

(घ) स्'ाफ को ऋण 0

(ङ) अच्छे समझे गए अन्य जमानती ऋण एवं अग्रिम 100

(च) खरीदे /भुनाए गए बिल 100

(छ) अन्य (उल्लेख करें) 100

 

(5) अचल आस्तियां (निवल मूल्यह्सा)

(क) पट्टे पर दी गई आस्तियां (निवल बही मूल्य) 100

(ख) परिसर 100

(ग) फर्नीचर और जुड़नार 100

(घ) अन्य अचल आस्तियां (उल्लेख करें) 100

(6) अन्य आस्तियां

(क) स्रोत पर का'ा गया आय-कर (निवल प्रावधान) 0

(ख) भुगतान किया गया अग्रिम कर (निवल प्रावधान) 0

(ग) सरकारी प्रतिभूतियों पर देय ब्याज 0

(घ) अन्य (उल्लेख करें) 100

 

ि'प्पणियां

(1) घ'ाए जाने का कार्य केवल उन आस्तियों के संबंध में किया जाए, जिनमें प्रावधान अवक्षयण के लिए या अशोध्य एवं संदिग्ध ऋणों के लिए किया गया है ।

(2) किराए पर लिया माल वित्तीय प्रभारों अर्थात ब्याज एवं वसूली योग्य अन्य प्रभारों को घ'ा कर दर्शाया जाना चाहिए ।

(3) उन आस्तियों, जो अनु. 2(1)(श) के अनुसरण में, ि'यर-। पूंजी निकालने के लिए स्वाधिकृत निधि से का' ली गई है, को "0" की भारिता मिलेगी ।

[(4) 50% के जोखिम भार के लिए ग्राह्य होने के लिए, बंधक समथ्ठिात प्रतिभूति, प्राप्ति या उप-स्पष्'ाúकरण (2) की मद (गक) में निर्दिष्' कोई अन्य

प्रतिभूति को निम्नलिखित नियम एवं शर्तों पर पूरा करना चाहिए, अर्थात -

(क) न्यास या प्रतिभूतिकरण कंपनी के पक्ष में प्रवर्तक आवास वित्त कंपनी या अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक द्वारा उसके अधीन प्राप्य राशियां और उसके

लिए प्रतिभूतियों सहित ऋण का समनुदेशन, जैसाकि प्रतिभूतिकरण और वित्तीय आस्तियों के पुनर्निर्माण और प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम,

2002 (2002 का 54) की धारा (2) की उपधारा (1) के खंड (जेडए) में यथा परिभाषित, ऐसी प्राप्ति जारी करना या अन्य प्रतिभूति पूर्ण एवं

अप्रति संहरणीय है ।

(ख) न्यास या प्रतिभूतिकरण कंपनी अनन्य रूप से ऐसी प्राप्ति या अन्य प्रतिभूति में निवेशकों के लाभार्थ उसके लिए प्रतिभूतियों सहित ऋण धारित किए हुए है ।

(ग) प्रतिभूतिकरण संबंधी लेनदेन, जिसमें ऐसी बंधक समर्थित प्रतिभूति, प्राप्ति या अन्य प्रतिभूति जारी की गई हैं, के प्रतिभूतिकरण में भाग लेने वाली

प्रवर्तक आवास वित्त कंपनी या अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक ऋण वृद्धि या जलनिधि सुविधाओं का विक्रेता, प्रबंधक, सेवा देने या प्रदान करने वाले के रूप

में,

(i) प्रतिभूतिकरण कंपनी की पूंजी में कोई साम्य या अधिमान शेयरों का स्वामी नहीं है या न्यास का हिताधिकारी है,

(ii) ऐसे ढंग से न्यास या प्रतिभूतिकरण कंपनी को नामोदिष्' नहीं किया है जिसमें उसका कोई संबंध निहित है,

(iii) उसका कोई निदेशक, अधिकारी या कर्मचारी तबतक प्रतिभूतिकरण कंपनी के निदेशक मंडल में नहीं होता है, जब तक निदेशक मंडल कम स

ट कम तीन सदस्यीय नहीं बनाया जाता है और उसमें स्वतंत्र निदेशकों की संख्या अधिक नहीं है तथा प्रतिभूतिकरण कंपनी के निदेशक मंडल प्रवर्तक

संस्थान का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारी के पास वी'ाट पावर नहीं है,

(iv) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से न्यास या प्रतिभूतिकरण कंपनी को नियंत्रित नहीं करती है, और

(v) प्रतिभूतिकरण संबंधी लेनदेन से उत्पन्न या इससे संबद्ध निवेशकों को हुई किसी हानि में सहायता देने के लिए सहमत नहीं हुई है या लेनदेन संबंधी

आवर्ती व्यय वहन करने पर सहमत नहीं हुई है ।

(घ)प्रतिभूतिकृत प्रत्येक ऋण आवासीय अचल संपत्ति क ट अधिग्रहण/निर्माणार्थ किसी व्यक्ति को दिया गया अग्रिम ऋण होता है जिसे अनन्य आधार पर

प्रवर्तक आवास वित्त कंपनी या अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक के पक्ष में बंधक रखा गया है ।

(ड.)प्रतिभूतिकृत ऋण का न्यास/ प्रतिभूतिक रण कंपनी को समनुदेशन के समय ऋण पात्रता निर्धारण अभिकरणों में किसी भी निर्धारण अभिकरण

का दिया हुआ निवेश ग्रेड दर्जा निर्धारण था ।

(च) निवेशकों को हक है कि वे निर्गमकर्ता-न्यास/ प्रतिभूतिकरण कंपनी को व्यतिक्रम की स्थिति में वसूली के लिए आवश्यक कदम उठाने को कह सकें

और निर्गम की प्राप्ति या अन्य प्रतिभूति की शर्तों के अनुसार निवेशकों में प्रतिफल की निवल राशि संवितरित कर सकें ।

(छ) न्यास या प्रतिभूतिकरण कंपनी ऐसे निर्गम, जिसमें निवेश नहीं किया गया है, को जारी करने वाला न्यास या प्रतिकरण कंपनी निर्गम के व्यापार और

आवास ऋणों के प्रशासन को छोड़कर किसी अन्य कार्य में नहीं लगी है ।

(ज) निर्गम का प्रबंध करने के लिए नियुक्त किए गए न्यासीगणों को भारतीय न्यास अधिनियम, 1982 (1982 का 2) के उपबंधों से अभिशासित किया जाता है ।]1

 
 

तुलन-पत्र बाह्य मदें

(2) इन निर्देशों में, तुलनपत्र बाह्य मदों से जुड़ी ऋण जोखिम निवेश की मात्रा की ऋण संपरिवर्तन कारक के एक प्रतिशत रूप में अभिव्यक्त किए गए हैं । अर्थात प्रत्येक मद के अंकित मूल्य को तुलनपत्र बाह्य मदों का जोखिम समायोजित मूल्य निकालने के लिए, पहले सुसंगत संपरिवर्तन

कारक से गुणा करना आवश्यक है । कुल योग की न्यूनतम पूंजी अनुपात की गणना के लिए हिसाब में लिया जाएगा । तुलनपत्र बाह्य मदों के जोखिम

भारित मूल्य को गैर निधिकृत मदों के ऋण संपरिवर्तत कारकों के अनुसार परिकलित किया जाएगा जिसका विवरण नीचे दिया जाता है :-

मद का विवरण ऋण संपरिवर्तत कारक (%)

i) संस्तुत परंतु असंवितरित आवास ऋण 50

प्ii) वित्तीय एवं अन्य गारंि'यां 100

iii) शेयर डिबेंचर के हामीदारी दायित्व 50

iv) अंशत: प्रदत्त शेयर डिबेंचर 100

v) बट्टाकृत पुन: बट्टाकृत बिल 100

vi) तय परंतु अनिष्पादित पट्टा करार 100

vii) अन्य संभाव्य देयताएं (उल्लेख करें) 50

किंतु यह तब, जबकि, उपर्युक्त मद (1) में, उन मामलों जिनमें कोई प्रलेख निष्पादित नहीं किया गया है, में कोई संवितरण नहीं हुआ है, और यदि समय

के क्रम में संस्वीकृत व्यपगत हो जाती है तथा संभावित उधारकर्ता को इस

1. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.3/सीएमडी/2002 दिनांक 27 दिसम्बर, 2002 के अनुच्छेद 9(3) द्वारा सम्मिलित

दिशा में नोि'स दे दिया जाता है, तब ऋण संपरिवर्तन कारक को यथा 0 प्रतिशत माना जाएगा और आंशिक रूप में संवितरित आवास ऋणों के

मामले में, ऋण संपरिवर्तन कारक को यथा 50 प्रतिशत माना जाएगा ।

ि'प्पणी:

नकदी मार्जिन/जमा राशियें की क'ाठती संपरिवर्तन कारक लागू करने से पूर्व की जाएगी ।

[पूंजी बाजार में निवेश, स्थावर संपत्ति में निवेश करने पर एवं दलाल रखने पर प्रतिबंध

27. (1) कोई भी आवास वित्त कंपनी

[(क) भूमि या भवन, सिवाय अपने इस्तेमाल के, में अपनी पूंजीगत निधियों के बीस प्रतिशत से अधिक निवेश नहीं करेगी,

बशर्ते कि ऐसा कुल निवेश अपनी स्वत्व निधियों का 10 प्रतिशत आवासीय इकाइयों पर किया जाएगा]2

ि'प्पणी:

'पूंजीगत निधि' से आशय कुल 'ि'यर-। पूंजी' एवं 'ि'यर-।। पूंजी' है ।"]2

(ख) यथा पूर्वतम वर्ष के 31 मार्च को (वाणिज्यिक पेपर सहित) कुल बकाया अग्रिमों के 5 प्रतिशत की एक उच्चतम सीमा से अधिक, शेयर कंपनियों

के संपरिवर्तनीय ऋण पत्रों और साम्य उन्मुख म्युचुअल फंडों की यूनि'टं अर्जित नहीं करेगी । पूंजी बाजार में कुल निवेश के लिए 5 प्रतिशत की समग्र

उच्चतम सीमा के भीतर, शेयरों, संपरिवर्तनीय बंधपत्रों एवं ऋण पत्रों और म्युचुअल फंडों, साम्य उन्मुख यूनि'ाटं में से किसी आवास वित्त कंपनी की

ओर से निवेश उसके अपने निवल धन के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए ।

किंतु यह, तब जबकि अपने ऋणों के चुकाने में अर्जित भूमि या भवन या कंपनियों के शेयर, संपरिवर्तनीय बंधपत्र, ऋण-पत्र या साम्य उन्मुख म्युचुअल

फंडों की यूनि'ाटं को आवास वित्त कंपनी द्वारा ऐसे अर्जन की तारीख से तीन वर्षों की एक अवधि या ऐसी किसी अवधि जो राष्'ाúय आवास बैंक की ओर

से बढ़ाई जाए, के भीतर निप'ा दिया जाएगा, यदि आवास वित्त कंपनी द्वारा पहले से धारित ऐसी आस्तियों सहित इन आस्तियों में निवेश उपर्युक्त उच्चतम

सीमा से अधिक हो जाता है ,

इसके अतिरिक्त यह तब, जबकि उपर्युक्त उपबंधों के लागू होने की तारीख यहां ऊपर विनिर्दिष्' उच्चतम सीमा से अधिक कंपनी द्वारा धारित भूमि या भवन

या कंपनियों के शेयर, संपरिवर्तनीय बंधपत्र या ऋण-पत्र, साम्य उन्मुख म्युचुअल फंडों की यूनि'ाटं को निप'ा दिया जाएगा, जिससे कि ऐसी धारिता को

आवास वित्त कंपनी द्वारा कथित उच्चतम सीमा के भीतर तीन वर्षों में या ऐसी अवधि जो इन निर्देशों के प्रवर्तन में आने की तारीख से राष्ट्रीय आवास

बैंक द्वारा बढ़ाई जाए, के भीतर नीचे ले आया जाए ।

(2)निवेश के लेनदेन से संबंधित कार्रवाई करने के लिए दलाल रखने हेतु आवास वित्त कंपनियों को निम्नलिखित का पालन करना चाहिए -

(क)लेनदेन को दलाल के खातों के जरिए नहीं किया जाना चाहिए । दलाल के सौदे पर दी जाने वाली दलाली, यदि कोई है (यदि सौदा दलाल की सहायता

से किया गया था) लेनदेन के जरिए की जाने के अनुमोदनार्थ शीर्ष प्रबंधन के सामने प्रस्तुत किए गए नो'/ज्ञापन में स्पष्' रूप से उपदर्शित की जानी

चाहिए और संदत्त दलाली का पृथक लेखा दलाल क्रम से रखा जाना चाहिए ।

1. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.7/सीएमडी/2003 दिनांक 10 दिसम्बर, 2003 द्वारा प्रतिस्थापित

(ख) यदि कोई सौदा दलाल की सहायता से किया जाता है तब दलाल की भूमिका दोनों पक्षकारों को एक साथ मिलाकर सौदा करने तक प्रतिबंधित

होनी चाहिए ,

(ग) सैदे पर बातचीत करते समय, दलाल सौदे के प्रतिपक्षकार की पहचान बताने के लिए बाध्य नहीं है । सौदा पूरा होने पर, उसे प्रतिपक्षकार को बताना

चाहिए और उसके अनुबंध नो' में प्रतिपक्षकार का नाम स्पष्' रूप से उपदर्शित करना चाहिए ।

(घ) प्रतिपक्षकार का नाम प्रक' करने वाले अनुबंध नो' के आधार पर, सौदों अर्थात निधियों का परिनिर्धारण और प्रतिभूति की सुपुर्दगी, दोनों का

परिनिर्धारण सीधे पक्षकारों के बीच होना चाहिए और इस प्रक्रिया में दलाल की कोई भूमिका नहीं है ।

(ङ) उनके शीर्ष प्रबंधन के अनुमोदन से, आवास वित्त कंपनियों को अनुमोदित प्राधिकृत दलालों की एक नामावली तैयार करनी चाहिए जिसका वार्षिक

या यदि अभीष्' है, तब यदाकदा पुनरीक्षण होना चाहिए ।

(च) अपने शीर्ष प्रबंधन के अनुमोदन से आवास वित्त कंपनियों को अनुमोदित प्राधिकृत दलालों की नामावली तैयार करनी चाहिए जिसका पुनरीक्षण

वार्षिक रूप से या यदि अभीष्' है तो यदाकदा किया जाता रहना चाहिए । दलालों की ऋण विश्वसनीयता, बाजार प्रतिष्ठा आदि के सत्यापन सहित उनकी

नामावली तैयार करने के लिए सुस्पष्' मानदंड निर्धारित किए जाने चाहिए । उनके माध्यम से किए गए सौदों के दलाल क्रम से विवरण का और संदत्त

दलाली का अभिलेख रखा जाना चाहिए ।

(छ) व्यापार का कोई असमानुपातिक भाग केवल एक या कुछेक दलालों के माध्यम से नहीं करना चाहिए । आवास वित्त कंपनियों को अनुमोदित दलालों में

से प्रत्येक के लिए कुल अनुबंध सीमा नियत करनी चाहिए । कुल (अर्थात क्रय-विक्रय, दोनों के) लेनदेन की आवास वित्त कंपनी द्वारा एक वर्ष में

किए गए लेनदेन की 5% की सीमा को अनुमोदित दलालों में से प्रत्येक के लिए यथा कुल ऊपरी अनुबंध सीमा मानी जानी चाहिए । इस सीमा के भीतर

किसी आवास वित्त कंपनी द्वारा प्रारम्भ किया गया व्यापार एवं किसी दलाल के द्वारा किसी आवास वित्त कंपनी के लिए लाया गया/प्रस्तुत किया गया

व्यापार, दोनों आने चाहिए । आवास वित्त कंपनियों को सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी एक वर्ष में अलग-अलग दलालों के माध्यम से किए गए

लेनदेन सामान्यतया इस सीमा से अधिक नहीं होते । तथापि, यदि किसी भी कारण से, किसी दलाल के लिए कुल सीमा को पार कर जाना आवश्यक हो जाता

है, तब दलालों के माध्यम से सौदा करने के लिए सशक्त प्राधिकारी द्वारा लिखित में ऐसे विनिर्दिष्' कारणों का अभिलेख किया जाना चाहिए । इसके

अतिरिक्त, निदेशक मंडल को उसकी कार्योत्तर सूचना दी जानी चाहिए । तथापि, 5% का मानदंड-(1) ऐसी किसी आवास वित्त कंपनी, जिसका कुल

लेनदेन एक वर्ष में 20 करोड़ रुपए से अधिक नहीं होता है और (2) प्राथमिक दलालों के माध्यम से सौदे करने वाली आवास वित्त कंपनियों के लिए लागू

नहीं होगा ।

(ज) जो लेखा परीक्षक राजकोष परिचालन का लेखा परीक्षण करते हैं, उनको दलालों के माध्यम से किए गए व्यापार की संवीक्षा भी करनी चाहिए और

आवास वित्त कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को प्रस्तुत की जानेवाली अपनी रिपो'द में इसे शामिल करना चाहिए । इसके अतिरिक्त, किसी भी

वैयक्तिक दलाल या दलालों के माध्यम से सीमा से अधिक किए गए व्यापार को कारणों सहित, निदेशक मंडल के लिए अर्ध वार्षिक पुनरीक्षण में

शामिल करना चाहिए ।

अपवाद

नो' : आवास वित्त कंपनियां राष्ट्रीय शेयर बाजार, भारतीय ओ'ाúसी विनिमय एवं मुम्बई शेयर बाजार के सदस्यों के माध्यम से प्रतिभूतियों का लेनदेन

कर सकती हैं । यदि ऐसे लेनदेन राष्ट्रीय शेयर बाजार, ओ'ाúसीई आई या मुम्बई शेयर बाजार में नहीं किए जाते हैं, तब उन्हें आवास वित्त कंपनियों द्वारा,

दलाल रखे बिना सीधे ही करना चाहिए ।]1

1. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.3/सीएमडी/2002 दिनांक 27 दिसम्बर, 2002 के अनुच्छेद 10 द्वारा प्रतिस्थापित

त्रण/निवेश का संकेन्द्रण

 

28.(1) कोई भी आवास वित्त कंपनी निम्नलिखित नहीं करेगी -

(i) किसी -

(क) एकल उधारकर्ता को अपनी स्वाधिकृत निधि के 15 प्रतिशत से अधिक उधार नहीं देगी, और

(ख) उधारकर्ताओं के किसी एकल समूह को अपनी स्वाध्ंिाकृत निधि के 25 प्रतिशत से अधिक उधार नहीं देगी ।

(ii) किसी -

(क) किसी अन्य कंपनी के शेयरों में अपनी स्वाधिकृत निधि के 15 प्रतिशत से अधिक, और

(ख) कंपनियों के एक एकल समूह के शेयरों में अपनी स्वाधिकृत निधि के 25 प्रतिशत से अधिक

(iii) निम्नलिखित को निम्न सीमा से अधिक (एक साथ ऋण/निवेश) उधार नहीं देगी/निवेश नहीं करेगी -

(क) एक एकल पक्ष को अपनी स्वाधिकृत निधि के 25 प्रतिशत से अधिक

(ख) किसी एक एकल समूह के पक्षों को अपनी स्वाधिकृत निधि के 40 प्रतिशत से अधिक

 

(2) यहां ऊपर विनिर्दिष्' एवं इन निर्देशों के प्रारंभ होने की तारीख को विद्यमान उच्चतम सीमा से अधिक आवास वित्त कंपनी द्वारा किया गया निवेश तथा

प्रदत्त कोई ऋण उस आवास वित्त कंपनी द्वारा यथा समय पुनर्भुगतान की अनुसूची के अनुसार नीचे लाया जाएगा ।

ि'प्पणी:

(1) ऊपर लिखी सीमा को अवधारित करने के प्रयोजन से, तुलनपत्र बाह्य निवेश को यहां ऊपर स्पष्' किए गए संपरिवर्तन कारकों को लागू करके

ऋण जोखिम में परिवर्तित किया जाए ।

(2) उपर्युक्त प्रयोजन के लिए, ऋण पत्रों में निवेश को यथा ऋण समझा जाए न कि निवेश ।

(3) ऋण निवेश पर उपर्युक्त उच्चतम सीमा उधारकर्ताओं /निवेशी कंपनियों के अतिरिक्त अपने समूह की आवास वित्त कंपनियों के लिए लागू होगी ।

 

अध्याय IV - लेखा-परीक्षकों को निर्देश

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लेखा-परीक्षकों की रिपो'द में निर्दिष्' विषय शामिल हों

29. ये निर्देश प्रारम्भ होने के बाद आवास वित्त कंपनियों के लेखा पर कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 227 के अन्तर्गत परीक्षकों

द्वारा दी गई रिपो'द के अतिरिक्त, लेखा-परीक्षक नीचे दिए गए अनुच्छेद 30 और 31 में निर्दिष्' मामलों पर कंपनी के निदेशक मंडल को भी रिपो'द भेजेंगे ।

 

लेखा परीक्षक की रिपो'द में शामिल होने वाले विषय

 

30.

30. आवास वित्त कंपनियें के लेखा परीक्षक की रिपो'द में निम्नलिखित विषयों पर एक विवरण दिया जाए -

(i)यदि आवास वित्त कंपनी की स्थापना 12 जून, 2000 से पहले हुई हो तो क्या उसने राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 की धारा 29क के अनुसार

यथा अपेक्षित पंजीकरण के लिए आवेदन किया है और क्या उसे अपने पंजीकरण का प्रमाण पत्र मिलने या न मिलने के बारे में राष्ट्रीय आवास बैंक से

कोई पत्र मिला ।

(ii)यदि आवास वित्त कंपनी की स्थापना 12 जून, 2000 को या उसके बाद हुई हो तो क्या उसे रा.आ. बैंक से पंजीकरण प्रमाण-पत्र मिला ।

(iii)क्या आवास वित्त कंपनी ने राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 की धारा 29ख में किए उल्लेखानुसार चल निधि अपेक्षाओं का अनुपालन किया

और प्रतिभूतियों को नामित बैंक में रखा,

(iv)क्या आवास वित्त कंपनी ने राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 की धारा 29ग का अनुपालन किया

(v)क्या आवास वित्त कंपनी ने इन निर्देशों के उपबंधों का अनुपालन किया,

(vi)क्या रा.आ.बैंक को प्रस्तुत विवरणी में उल्लिखित पूंजी पर्याप्तता अनुपात का ठीक-ठीक निर्धारण किया गया है और क्या यह अनुपात उन निर्देशों

में रा.आ.बैंक द्वारा उल्लिखित जोखिम वाली आस्ति अनुपात के न्यूनतम पूंजी के अनुरूप है,

(vii)जहां आवास वित्त कंपनी जनता से निक्षेप स्वीकार/धारित कर रही है, क्या

(क) आवास वित्त कंपनी द्वारा स्वीकृत सार्वजनिक निक्षेप अनुमत्य सीमा के अन्तर्गत हैं,

(ख)आवास वित्त कंपनी के कुल ऋण अर्थात सार्वजनिक निक्षेप सहित निक्षेप तथा भा.रि. बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45आई की उपधारा

(खख) के उप खंड (iii) से (vii) में उल्लिखित राशि या राष्ट्रीय आवास बैंक से प्राप्त ऋण या अन्य सहायता राशि इन निर्देशों में निर्दिष्' सीमा के भीतर

है,

(ग)आवास वित्त कंपनी द्वारा अनुमत्य सीमा से अधिक धारित निक्षेपों को राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा निर्दिष्' विधि से नियमित कराया गया है,

(घ)निक्षेपों के लिए ऋण पात्रता निर्धारण अर्थात (पात्रता का उल्लेख करें) ऋण पात्रता निर्धारण एजेंसी द्वारा निर्धारित पर (तारीख) लागू है और वर्ष

के दौरान किसी समय बकाया कुल निक्षेप ऋण पात्रता निर्धारण एजेंसी द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक हो गई,

(ङ) आवास वित्त कंपनी अपने जमाकर्ताओं को उनके निक्षेपों पर ब्याज का भुगतान करने और/या मूलधन लौ'ाने में विफल रही जबकि वह ब्याज

ओर/या मूलधन देय हो चुका था,

(च)सार्वजनिक जमाओं को स्वीकार करने के लिए नई शाखाएं या कार्यालय खोलने या शाखाएं या कार्यालय बंद करने के मामले में, आवास वित्त

कंपनी ने इन निर्देशों के संगत प्रावधानों का अनुपालन किया,

(viii)जहां आवास वित्त कंपनी सार्वजनिक निक्षेप स्वीकार नहीं करती है - वहां क्या

(क) निदेशक मंडल ने सार्वजनिक निक्षेप स्वीकार न करने के बारे में कोई प्रस्ताव पास किया,

(ख) कंपनी ने विचाराधीन अवधि/वर्ष के दौरान कोई सार्वजनिक निक्षेप स्वीकार किया,

(ग) कंपनी ने विवेक सम्मत मानदंडों का अनुपालन किया ।

प्रतिकूल या सापेक्ष विवरण के लिए कारणों का उल्लेख किया जाए

31. जहां, लेखा परीक्षक की रिपो'द में, उपरोक्त अनुच्छेद 30 में उल्लिखित किसी मद के बारे में दिया गया विवरण प्रतिकूल या सापेक्ष हो तो लेखा

परीक्षक की रिपो'द में उस प्रतिकूल या सापेक्ष विवरण देने, जो भी मामला हो, के कारणों का उल्लेख किया जाए । जब लेखा परीक्षक उपरोक्त अनुच्छेद

30 में उल्लिखित किसी मद के बारे में अपना मत व्यक्त करने में असमर्थ हों, तो लेखा परीक्षक की रिपो'द में कारणों सहित इस आशय का भी उल्लेख किया जाएगा ।

राष्ट्रीय आवास बैंक को रिपो'द भेजने के लिए लेखा परीक्षक का उत्तरदायित्च

 

32.जहां, आवास वित्त कंपनी के मामले में, उपरोक्त अनुच्छेद 30 में उल्लिखित किसी मद के बारे में विवरण प्रतिकूल या सापेक्ष हो या लेखा परीक्षक की

राय में कंपनी ने इन निर्देशों के प्रावधानों या अधिनियम के अध्याय- V के प्रावधानों का अनुपालन न किया हो तो लेखा परीक्षक का यह उत्तरदायित्व

होगा कि उस प्रतिकूल या सापेक्ष विवरण के ब्योरे और/या अनुपालन न करने के बारे में, जो भी मामला हो, रिपो'द में दें और उसे नई दिल्ली स्थित

रा.आ.बैंक के मुख्य कार्यालय को भेजें ।

 

अध्याय V - विविध

 

आवास वित्त कंपनी के अपने शेयरों के आधार पर ऋण देने पर रोक

33. (1) कोई भी आवास वित्त कंपनी अपने शेयरों के आधार पर ऋण नहीं देगी ।

(ख) किसी आवास वित्त कंपनी द्वारा इन निर्देशों के लागू होने की तारीख पर अपने ही शेयरों के आधार पर दिए गए बकाया ऋण की वसूली आवास

वित्त कंपनी द्वारा पुनर्भुगतान अनुसूची के अनुसार की जाएगी ।

 

 

सार्वजनिक निक्षेप लौ'ाने में असफल आवास वित्त कंपनियों पर ऋण देने तथा निवेश करने पर रोक

 

34. आवास वित्त कंपनी जो कोई सार्वजनिक निक्षेप या उसके अंश को अधिनियम की धारा 36क(1) में उल्लिखित निक्षेप शर्तों के अनुसार लौ'ाने मे

ं विफल रही, वह कंपनी चूककर्ता रहने तक किसी भी नाम से कोई ऋण या कोई अन्य आस्ति का सृजन नहीं कर सकेगी ।

लेखा समिति का गठन

35. जिस आवास वित्त कंपनी की आस्ति उसकी पिछली संपरीक्षित तुलन पत्र के अनुसार 50 करोड़ रुपए या अधिक होगी वह लेखा परीक्षा समिति का

गठन करेगी जिसमें बोर्ड में कम से कम 3 गैर कार्यकारी निदेशक होंगे ।

[स्पष्'ाúकरण

इस अनुच्छेद के अधीन गठित लेखा परीक्षा समिति के वही अधिकार, प्रकार्य एवं कर्तव्य होंगे जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा

292ए में निर्धारित किए गए हैं ।]1

लेखा वर्ष

36. प्रत्येक आवास वित्त कंपनी 31 मार्च, 2002 को समाप्त लेखा वर्ष से प्रत्येक वर्ष 31 मार्च को अपना तुलन पत्र तथा लाभ-हानि लेखा तैयार करेगी ।

बशर्ते कि यदि किसी आवास वित्त कंपनी का लेखा वर्ष 31 मार्च, 2002 के बजाए किसी अन्य को समाप्त होता है तो वह आवास वित्त कंपनी 31 मार्च, 2002

को समाप्त वर्ष के बीच अंतराल अवधि का अपना तुलन पत्र और लाभ-हानि लेखा तैयार करेगी ।

तुलन-पत्र और लेखा की प्रतियों के साथ निदेशक की रिपो'द राष्ट्रीय आवास बैंक को प्रस्तुत करना

37. प्रत्येक आवास वित्त कंपनी प्रत्येक वित्त वर्ष की अंतिम तारीख को संपरीक्षित तुलन पत्र तथा आम सभा में आवास वित्त कंपनी द्वारा अनुमोदित

उस वर्ष का संपरीक्षित लाभ-हानि लेखा के साथ कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की

1. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.3/सीएमडी/2002 दिनांक 27 दिसम्बर, 2002 के अनुच्छेद 11 द्वारा सम्मिलित

धारा 217 (1) की शर्तों के अनुसार उस बैठक में आवास वित्त कंपनी के समक्ष प्रस्तुत निदेशक मंडल की रिपो'द की एक प्रति के साथ बैठक की

तारीख से 15 दिन के अंदर राष्ट्रीय आवास बैंक को भेजेगी, इनके साथ ही उसके लेखा परीक्षकों द्वारा प्रस्तुत रिपो'द तथा लेखा ि'प्पणियों की एक प्रति

भी भेजी जाए ।

लेखा-परीक्षक प्रमाण-पत्र

38. सार्वजनिक निक्षेप धारित/स्वीकार करने वाली प्रत्येक आवास वित्त कंपनी अनुच्छेद 37 में किए उल्लेखानुसार संपरीक्षित तुलन पत्र की एक प्रति,

निदेशक मंडल को प्रस्तुत लेखा परीक्षक की रिपो'द की एक प्रति तथा उसके लेखा परीक्षकों द्वारा इस आशय का प्रमाण-पत्र राष्ट्रीय आवास बैंक को

प्रस्तुत करेगी कि जमाकर्ताओं के प्रति कंपनी की संपूर्ण राशि देयता को तथा उस पर देय ब्याज को तुलन-पत्र में सही रूप में दर्शाया गया है एवं कंपनी

इन सभी देयताओं की राशि का भुगतान करने की स्थिति में है ।

राष्ट्रीय आवास बैंक को प्रस्तुत की जाने वाली विवरणियां

39"अनुच्छेद 37 के प्रावधानों के पूर्वाग्रह के बिना, प्रत्येक आवास वित्त कंपनी राष्ट्रीय आवास बैंक को निम्न दस्तावेज प्रस्तुत करेगी :

(i) इन निर्देशों की अनुसूची I में उल्लिखित सूचना प्रति वर्ष यथा 31 मार्च की अपनी स्थिति के संदर्भ में और इन निर्देशों की

अनुसूची II में उल्लिखित सूचना प्रत्येक वर्ष 30 सितम्बर और 31 मार्च की अपनी स्थिति के संदर्भ में छमाही विवरणी

(ii) इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक जमा राशियां स्वीकार/धारित करने वाली आवास वित्त कंपनियां, सार्वजनिक जमा राशियां स्वीकार/धारण

न करने वाली आवास वित्त कंपनियां किन्तु जिनकी आस्तियां 100 करोड़ रुपए या अधिक है, इन निर्देशों की अनुसूची III में उल्लिखित

सूचना, प्रत्येक कैलेंडर तिमाही के अंत में अपनी स्थिति के संदर्भ में तिमाही विवरणी राष्ट्रीय आवास बैंक को प्रस्तुत करेंगी । ]1

(2)(i) प्रत्येक आवास वित्त कंपनी, अपना व्यवसाय आरंभ करने से एक माह के भीतर, रा.आ. बैंक को निम्नलिखित सूची के अनुसार एक लिखित

विवरण प्रस्तुत करेगी -

(क) अपने प्रमुख अधिकारियों के नाम और कार्यालय में उनका पद

(ख) पंजीकृत/कारपोरे' कार्यालय का पूरा डाक पता, 'टलीफोन नम्बर और फैक्स नम्बर

(ग) कंपनी के लेखा परीक्षकों के नाम और कार्यालय का पता

(घ)आवास वित्त कंपनी के निदेशकों के नाम और निवास स्थान का पता, और

(ङ) आवास वित्त कंपनी की ओर से उप अनुच्छेद (1) में उल्लिखित विवरणियों पर हस्ताक्षर करने के लिए प्राधिकृत अधिकारियों के हस्ताक्षरों के नमूने ।

(iii) इस उप अनुच्छेद के खंड (1) में उल्लिखित सूची में किसी भी संशोधन के बारे में, संशोधन करने की तारीख से एक माह के भीतर इस आशय की सूचना राष्ट्रीय आवास बैंक को भेजी जाएगी ।

1. अधिसूचना सं. एनएचबी.एचएफसी.डीआईआर.9/सीएमडी/2005 दिनांक 10 जनवरी, 2005 द्वारा प्रतिस्थापित नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आवास बैंक के कार्यालय को प्रस्तुत किया जाने वाला तुलन-पत्र, विवरणियां आदि

40. इन निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय आवास बैंक को प्रस्तुत/प्रेषित की जाने वाली विवरणियों,तुलनपत्र या सूचना नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आवास बैंक के कार्यालय को प्रस्तुत/प्रेषित की जाए ।

छू'

41. राष्ट्रीय आवास बैंक, यदि किसी कठिनाई को दूर करने या किसी अन्य उचित और पर्याप्त कारण के लिए वह यह आवश्यक समझता है तो राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा यथा अधिरोपित ऐसी शर्तों के अध्यधीन या तो सामान्य रूप से या किसी विनिर्दिष्' अवधि के लिए इन निर्देशों के सभी या किन्हीं प्रावधानों का अनुपालन करने या उससे छू' देने के लिए किसी आवास वित्त कंपनी/कंपनियों के वर्ग को समयावधि बढ़ाने की मंजूरी दे सकता है ।

व्याख्या

42.इन निर्देशों के प्रावधानों को प्रभावी करने के उद्देश्य से, राष्ट्रीय आवास बैंक, यदि आवश्यक समझे, इसके अन्तर्गत आने वाले किसी भी मामले मे ं अपेक्षित स्पष्'ाúकरण जारी कर सकता है और राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा इन निर्देशों के किसी भी प्रावधान की नई व्याख्या अंतिम होगी और सभी पक्षों पर बाध्य होगी । आवास वित्त कंपनी (रा.आ.बैंक) निर्देश, 1989 के उल्लंघन के लिए की गई या की जाने वाली कार्रवाई से बचाव

43. एतदद्वारा यह स्पष्' किया जाता है कि समय-समय पर यथा संशोधित आवास वित्त कंपनी (रा.आ.बैंक) निर्देश, 1989 का अधिक्रमण किसी भी स्थिति में निम्नलिखित को प्रभावित नहीं करेगा:

(i) उसके तहत अर्जित, प्रोद्भाझत या उपगत कोई अधिकार, बाध्यता या दायित्व,

(ii) उसके तहत किए गए किसी उल्लंघन के संबंध में उपगत कोई शास्ति, समापहरण

(iii) पूर्वोक्त के अनुसार ऐसे किसी अधिकार, विशेषाधिकार,बाध्यता, दायित्व, शास्ति, समपहरण या दंड के संबंध में कोई जांच, कानूनी कार्यवाही या उपचार ।

और स्थापित की गई, जारी की गई या प्रवृत्त की गई ऐसी कोई जांच कानूनी कार्यवाही या उपचार और अधिरोपित की जा सकने वाली ऐसी कोई शास्ति, समापहरण या दंड जैसाकि मानों इन निर्देशों का अधिक्रमण नहीं किया गया है ।

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