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विनियम

किसी आवास संस्थान का व्यापार प्रारम्भ करने/ह्वालाने के लिए पंजिकरण के प्रमाण-पत्र
 
हेतु आवेदन (देखिए राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 की धारा 29ए)
 
पंजिकरण डाक से
 
प्रेषक : (पंजिकरण कार्यालय का स्पष्ट शब्दों में नाम एवं पता)
 

सेवा में,

 

उप महाप्रबंधक,

विनियमन एवं पर्यवेक्षण विभाग,

राष्ट्रीय आवास बैंक,

भारत पर्यावास केन्द्र, कोर - 5ए, तृतीय तल,

लोदी मार्ग, नई दिल्ली - 110 003

 

प्रिय महोदय,

 

विषय : रा.आ.बैंक अधिनियम, 1987 - किसी आवास वित्त

संस्थान का व्यापार प्रारम्भ करने/ह्वालाने* के लिए

पंजिकरण के प्रमाण-पत्र हेतु आवेदन

 
हम पंजिकरण का एक प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए शीर्षांकित अधिनियम की धारा 29ए के अनुसार यह आवेदन देते हैं । अनुदेशों के अनुसार, अपेक्षित दस्तावेज़/जानकारी प्रस्तुत की जाती है ।
 

2. हम किसी आवास वित्त कंपनी का व्यापार प्रारम्भ करने/ह्वालाने के इह्वछुक हैं । अत: हम एतद्द्वारा आपसे अनुरोध करते हैं कि आप कृपया कथित अधिनियम की धारा 29ए के अधीन पंजिकरण का एक आवश्यक प्रमाण-पत्र जारी करें द्दाससे कि हमारी कंपनी किसी आवास वित्त संस्थान का व्यापार प्रारम्भ कर/ह्वाला सके ।

 

3. हम घोषणा करते हैं कि हमारे सर्वोत्तम ज्ञान एवं विश्वास के अनुसार, संलग्न* विवरण में दी गई जानकारी वास्तविक, सत्य एवं पूर्ण है ।

 

* जो लागू न हो, उसे काट दें ।

 

भवदीय,

कंपनी की मुहर (नाम एवं पदनाम)

तारीख :

स्थान :

संलग्नक : @

 

(i) पह्चान का विवरण (यथा अनुलग्नक-I)

((ii) वित्तीय स्थिति एवं अन्य जानकारी का सारांश (यथा अनुलग्नक-II)

(iii) निदेशकों का विवरण (यथा अनुलग्नक-III प्रत्येक निदेशक के लिए पृथक फॉर्म)

((iv) नवीनतम अवधि के लिए विवेकसम्मत मानदंदों पर विवरणी (यथा अनुलग्नक-IV)

(v) विनिर्दिष्ट रूप से, आवेदन प्रस्तुत करने और उसकी विषय-वस्तु का अनुमोदन करते हुए, निदेशक मंदृल का संकल्प (यथा अनुलग्नक-V) ।

(vi) संस्था अन्तर्नियमावली एवं बहिर्नियमावली की प्रमाणित प्रति ।

 

अनुदेश
 
(आवेदन-पत्र को सर्वथा इन अनुदेशों के अनुसार भरें)
 
सामान्य
 

1. आवेदन केवल विहित फॉर्म में दिया जाना चाहिए । द्दाहां स्थान पर्याप्त नहीं है, वहां, जानकारी पृथक-पत्रक में विधिवत् प्रति संदर्भ देते हुए प्रस्तुत की जाए ।

2. विधिवत् रूप से परिपूर्ण, संलग्नकों सहित आवेदन, राष्ट्रीय आवास बैंक, मुख्य कार्यालय, नई दिल्ली में 11 दिसम्बर, 2000 से पूर्व दो प्रतियों में प्रस्तुत किया जाना चाहिए ।

3. प्रस्तुत किए गए आवेदन-पत्र की एक फोटोकॉपी कंपनी में उसके अभिलेखार्थ रख ली जाए ।

4. आवेदन-पत्र पर हस्ताक्षर इस दिशा में निदेशक मंदृल की ओर से प्राधिकृत निम्नलिखित अधिकारियों में से किसी एक को हस्ताक्षर करने चाहिए (अर्थात् - अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, कंपनी सह्वाव, एक पूर्णकालिक निदेशक) ।

5. आवेदन-पत्र पर कंपनी की मुहर लगी होनी चाहिए । —

6. आवेदन प्रस्तुत किए जाने के लिए एक पावती प्राप्त की जाए ।—

7. आवेदन-पत्र के अनुलग्नक-IV में दिया जाने वाला विवरण/जानकारी कंपनी के नवीनतम वार्षिक संपरीक्षित तुलन-पत्र में प्रकट किए गए आंकद़ों पर आधारित होने चाहिएं । तथापि, 12 द्दाझन, 2000 के बाद निगमित किसी कंपनी के मामले में, ऐसा विवरण/जानकारी आवेदन-पत्र की तारीख के पूर्वगत यथा तीस दिनों के भीतर पद़ृने वाली किसी तारीख के तुलन-पत्र पर आधारित होनी ह्वााहिए । अधिसूह्वाना की तारीख के बाद 25 लाख रुपए अथवा इससे अधिक की निवल स्वाधिकृत निधियां रखने वाली किसी भी नई आवास वित्त कंपनी के लिए किसी आवास वित्त संस्थान का अपना व्यापार प्रारम्भ करने से पूर्व पंजिकरण का प्रमाण-पत्र प्राप्त करना आवश्यक है ।

 
अनुलग्नक-I
 

8. यदि कंपनी ने पूर्वतम में अपना नाम बदल लिया है, तब कंपनी के सभी पूर्वतम नामों की एक सूची नाम बदलने की तारीख और उस समय कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और अध्यक्ष के नामां के साथ प्रस्तुत की जानी चाहिए । —

9. यदि कंपनी ने कभी समय रहते द्दामाराशियों के पुनर्भुगतान और ब्याद्दा के भुगतान का व्यतिक्रम किया है, तब ऐसे सभी लम्बित मामलों की और प्रत्येक मामले में की गई कार्रवाई की एक सूची प्रस्तुत की जानी चाहिए । कंपनी को उसके विरुद्ध न्यायालय में विचाराधीन सभी मामलों की एक सूची भी प्रस्तुत करनी चाहिए और इस सूची में वे मामले भी शामिल किए जाएं जो उपभोक्ता मंह्वा में विचाराधीन हैं, उसकी द्दामाराशियां स्वीकार करने संबंधी गतिविधियों से संबंध रखते हैं ।—

10. अनुलग्नक-I में क्रम सं.7(i) उन कंपनियों पर लागू होती है,जो आवास वित्त से भिन्न मुख्य उद्देश्य खंदृ के साथ निगमित हुई थीं और बाद में प्रधान व्यापार के रूप में आवास वित्त में परिवर्तित हो गईं और आवेदन-पत्र प्रस्तुत करने की तारीख तक अभी भी विधिमान्य हैं ।

 

अनुलग्नक-IV: लेखापरीक्षकों द्वारा यथा प्रमाणित, विवेकसम्मत मानदंदों से संबंधित नवीनतम विवरणी विधिवत् रूप से ह्वान्हित यथा अनुलग्नक-IV संलग्न की जाए । विवरणी का प्ररूप (फॉर्मेट) वही होना चाहिए जो विवेकसम्मत मानदंदों पर आवास वित्त कंपनियों के लिए दिशा-निर्देशों में दिया गया है द्दासकी एक प्रति उनमें से प्रत्येक के अनुपालनार्थ प्रेषित की गई थी ।

अनुलग्नक-I

पहचान संबंधी विवरण

 

कम्पनी कोदृ

(रा.आ.बैंक द्वारा भरा जाए)

(स्पष्ट अक्षरों में भरा जाए)_________

 

1.1

कंपनी का नाम

 

1.2

क्या कंपनी ने अपना नाम - -

पहले बदला है (कृपया अनुदेशों की मद 8 देखें)

हां/नहीं

2.

निगमन की तारीख

 

3.

व्यापार प्रारम्भ करने की तारीख

 

4.

कंपनी किस राद्दय में पंद्दााúकृत है ?

 

5.

कंपनी का पूरा पता

 

 

(i) पंजिकरण कार्यालय

_________________

_________________

_________________

फोन नं._________फैक्स नं._________

 

(ii) कॉरपोरेट/प्रशासनिक कार्यालय

_________________

_________________

_________________

फोन नं._________फैक्स नं._________

 

(iii) शाखाओं/कार्यालयों की संख्या

(iv) कर्मचारियो की संख्या:

6.

वर्तमान स्थिति

क. सार्वद्दानिक (ख) निद्दाा (ग) मानित सार्वद्दानिक (घ) सरकारी कंपनी (ङ) अन्य (विनिर्दिष्ट की द्दााए)

7.

क्या कंपनी 12 द्दाझन, 2000 को आवास वित्त संस्थान का प्रमुख व्यापार कर रही थी ? हां/नहीं

यदि हां, तब -

  • (i) ऐसा व्यापार प्रारम्भ करने की तारीख
  • (ii) क्या कंपनी ने कभी मूलधन के पुनर्भुगतान और/अथवा द्दामाराशियों पर ब्याद्दा के भुगतान में व्यतिक्रम किया है ? (कृपया अनुदेशों की मद सं.9 देखें)

हां/नहीं

8.

सांविधिक लेखापरीक्षकों के नाम और पते :

सदस्यता नं. सहित

________________

________________

________________

9.1

बैंकरों के नाम और पते

________________

________________

________________

9.2

बैंक खाते का विवरण, खाते की किस्म/क्या ऋण सुविधा का लाभ उख्रया ?

 

9.3

क्या कंपनी ने किसी ऋण, अग्रिम अथवा किसी बैंक/संस्थान से ली गई अन्य ऋण सुविधा के पुनर्भुगतान में कोई व्यतिक्रम किया है ? यदि हां, तब बैंक/संस्थान/शाखा का नाम, सुविधा का प्रकार, अवधि और व्यतिक्रम की प्रमात्रा इत्यादि द्दौसा पूर्ण विवरण दें । —

हां/नहीं

 

9.4

ऐसे ग़ैर-बैंककारी संस्थानों के नाम और पते द्दानके साथ कंपनी का किसी प्रकार का संबंध था ?

 

9.5

मुख्य कार्यकारी अधिकारी/प्राधिकृत अधिकारी का नाम एवं पदनाम

_________________

 

हस्ताक्षर :

नाम:

पदनाम :

 

तारीख :

स्थान :

 

अनुलग्नक - II

वित्तीय स्थिति का सारांश एवं अन्य द्दाानकारी -

 

 

राशि लाख रुपए में

 

क. वित्तीय स्थिति

1997-98

1998-99

1999-2000

1.

ह्वाजकता पूंद्दाा

 

 

2.

आरक्षित और अधिशेष निधियां

 

 

3.

निवल स्वाधिकृत निधियां (विवेकसम्मत मानदंदों पर विवरणी के अनुसार)

 

 

 

4.

प्रतिभूत ऋण

 

 

 

5.

अप्रतिभूत ऋण

 

 

 

 

  • (i) सार्वद्दानिक द्दामाराशियां
  • (ii) अन्य द्दामाराशियां/उधार की राशियां
  • (iii) कुल द्दामाराशियां

 

 

 

6.

ऋण निधियां (4+5(i)+(ii)

 

 

 

7.

कुल नियोद्दात निधियां (3+6)

 

 

 

 

निम्न के प्रति :

 

 

 

8.

आवास ऋण (बकाया और कुल आस्तियों का %)

 

 

 

9.

अन्य ऋण

 

 

 

10.

स्थायी आस्तियां

 

 

 

11.

निवेश

 

 

 

 

(i) सरकार से गारंटीकृत बांदृ

 

 

 

 

(ii) उद्धाञत शेयर

 

 

 

 

((iii)अनौद्धाञत शेयर

 

 

 

12.

ह्वाालू आस्तियां, ऋण एवं अग्रिम

 

 

 

13.

ह्वाालू देनदारियां एवं प्रावधान घटाएं

 

 

 

14.

निवल ह्वाालू आस्तियां (12-13)

 

 

 

15.

योग

 

 

 

 

ख. कार्यकरण संबंधी परिणाम

 

 

 

16.

आय

 

 

 

17.

व्यय

 

 

 

18.

कर-पूर्व लाभ (16-17)

 

 

 

19.

कर हेतु प्रावधान

 

 

 

20.

करोपरान्त लाभ (18-19)

 

 

 

21.

क. आरक्षित निधि में अन्तरित राशि

 

 

 

 

ख.विनियोग के लिए उपलब्ध राशि

 

 

 

 

ग. अन्य द्दाानकारी

 

 

 

22.

लाभांश (%)

 

 

 

23.

प्रति शेयर अर्द्दान

 

 

 

24.

मूल्य-अर्द्दान अनुपात

 

 

 

25.

वास्तव में संवितरित आवास ऋण

 

 

 

26.

अतिदेय राशियों का प्रतिशत (3 महीने और उससे ऊपर)

 

 

 

27.

बकाया ऋणों के लिए प्रशासनिक लागत - %

 

 

 

28.

आवश्यक अनुपात :

 

 

 

 

क. ह्वालनिधि अनुपात

 

 

 

 

ह्वाालू अनुपात

 

 

 

 

ख. ऋण साम्य (इक्विटी) अनुपात :

 

 

 

 

ऋण निधियों से स्वाधिकृत निधि में

 

 

 

 

(i) ब्याद्दा राशि अनुपात (समय)(पीबीआईटी/ब्याद्दा)

 

 

 

 

(ii) साम्य(इक्विटी)/पूंद्दाा पर विवरणी (पीएटी* 100/ब्याद्दा)

 

 

 

 

(iii) कुल आस्तियों पर विवरणी (पीएटी*100/कुल आस्तियां)

 

 

 

 

घ. पूंद्दाा पर्याप्तता अनुपात (%)

 

 

 

29.

ग़ैर-अनुपयोद्दय आस्तियां (राशि और कुल आस्तियों का (%)

 

 

 

30.

आस्ति गुणवत्ता :

 

 

 

 

क. मानक

 

 

 

ख. उप-मानक

 

 

 

 

ग. संदिग्ध

 

 

 

 

घ. हानिप्रद आस्तियां

 

 

 

31.

अभिज्ञान नहीं की गई आय

 

 

 

32.

ग़ैर-अनुपयोद्दय आस्तियों के लिए प्रावधान

 

 

 

33.

रखी गई अर्थसुलभ आस्तियां और अपूर्णता, यदि कोई है

 

 

 

 

(i) अप्रैल-द्दाझन

 

 

 

 

((ii) द्दाजलाई-सितम्बर

 

 

 

 

(iii) अक्तूबर-दिसम्बर

 

 

 

 

(iv) द्दानवरी-मार्ह्वा

 

 

 

34.

विवरणियां प्रस्तुत करने की स्थिति (तारीख):

 

 

 

 

क. वार्षिक विवरणी

 

 

 

 

ख. वार्षिक रिपोर्ट/संपरीक्षित तुलन-पत्र

 

 

 

 

ग. लेखापरीक्षक का प्रमाण-पत्र

 

 

 

 

घ. विज्ञापन के स्थान पर विज्ञापन अथवा विवरण

 

 

 

 

ङ विवेकसम्मत मानदंदों पर अर्धवार्षिक विवरणी :

 

 

 

 

(i) अप्रैल-सितम्बर

 

 

 

 

(ii) अक्तूबर-मार्ह्वा

 

 

 

 

ह्वा. अर्थसुलभ आस्तियों पर त्रैमासिक विवरणी :

 

 

 

 

(i) अप्रैल-द्दाझन

 

 

 

 

(ii) द्दाजलाई-सितम्बर

 

 

 

 

(iii) अक्तूबर-दिसम्बर

 

 

 

 

(iv) द्दानवरी-मार्ह्वा

 

 

 

35.

ऋण-पात्रता निर्धारण (क्रेदृट रेटिंग) और विधिमान्य तारीख

 

 

 

 

टिप्पणी :

(i) रा.आ.बैंक द्वारा बताई गई बकाया कमियां, यदि कोई हैं, को ख्रक करने की स्थिति, एक पृथक पत्रक में (मद क्रम से) दी जानी है ।

(ii) तीन वर्षों के लिए संपरीक्षित तुलन-पत्र एवं लाभ तथा हानि लेखा के साथ वार्षिक रिपोर्टें संलग्न की जानी चाहिए—

(iii) कंपनी की वर्तमान शेयर धारण पद्धति पृथक रूप से प्रस्तुत की द्दााए ।

 

___________________________________________________________________

अनुलग्नक - III

 
कंपनी के प्रवर्तकों, उसके अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक, निदेशकों और मुख्य कार्यपालक अधिकारी के बारे में जानकारी । (प्रत्येक प्रकार्यकारी के लिए पृथक प्रपत्र)
 
 

1.

नाम :

 

2.

पदनाम :

(अध्यक्ष/प्रबंध निदेशक/निदेशक/मुख्य कार्यपालक अधिकारी)

 

3.

राष्ट्रीयता :

 

4.

आयु :

 

5.

व्यापार का पता :

 

 

6.

आवासीय पता :

 

 

7.

शैक्षिक/व्यावसायिक योग्यता :

 

8.

व्यापार अथवा व्यवसाय किस प्रकार का है :

 

9.

ऐसी अन्य कंपनियों के नाम, द्दानमें अध्यक्ष/प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यकारी अधिकारी/निदेशक का पद धारण किया द्दाा रहा है :

 

10.

  • ((I) क्या किसी अवशिष्ट ग़ैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी, द्दासे सार्वद्दानिक द्दामाराशियां स्वीकार करने से प्रतिबंधित किया गया है । भा.रि.बैंक/रा.आ.बैंक की ओर से अभियोद्दात किया गया है, को शामिल करके किसी आवास वित्त कंपनी, ग़ैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी के साथ प्रवर्तक, अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक, निदेशक के रूप में सहयोद्दात था । —
  • (II) यदि हां, तब, उन कंपनियों के नाम

 

11.

क्या किसी फर्म/कंपनी के एक भागीदार/निदेशक की अथवा व्यक्तिगत हैसियत से किसी आर्थिक अपराध के लिए अभियोद्दात/अभियुक्त सिद्ध हुआ है, यदि हां, तब उसका विवरण दें । —

हां/नहीं

12.

आवास वित्त कंपनी के व्यापार में अनुभव (वर्षों की संख्या बताएं)

 

13.

कंपनी में साम्य (इक्विटी)शेयर धारण -

शेयरों की संख्या

अंकित मूल्य (रुपए)

कंपनी की कुल साम्य (इक्विटी)का प्रतिशत

 

14.

ऐसी कंपनियों/फर्मों और स्वामित्व प्रतिख्रन के नाम द्दानमें व्यक्ति पर्याप्त हित* रखता है ।

 

15.

उपर्युक्त 14 पर प्रतिख्रनों के प्रधान बैंकरों के नाम

 

16.

पिछले तीन वर्षों में प्रस्तुत की गई आयकर विवरणियां/निर्धारित आयकर

 

17.

तीन वर्षों में आयकर प्राधिकारियों के पास प्रस्तुत की गई धन-कर संबंधी विवरणी, यदि कोई है । —

 

हस्ताक्षर___________________

 

नाम______________________

पदनाम____________________

 

तारीख :

स्थान :

 

* "पर्याप्त हित" का अर्थ किसी व्यक्ति अथवा उसकी पत्नी/पति अवयस्क बालक लाभकारी हित रखना होता है । यह हित किसी कंपनी के शेयरों में/किसी फर्म की पूंजी में, संदत्त राशि में द्दासमें कंपनी की ह्वाजकता पूंजी के 10% से अधिक होता है, अथवा किसी भागीदारी फर्म के सभी भागीदारों द्वारा अभिदत्त कुल पूंजी में अकेले अथवा सबके साथ हो सकता है ।

 
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