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रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) ऋण के बारे में
रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) ऋण की प्रमुख विशेषताएं
 
रिवर्स मॉर्टगेज ऋण योजना के अधीन कोई भी वरिष्ठ नागरिक अर्थात् 60 वर्ष से अधिक की आयु का पुरुष/की महिला अपने मकान का स्वामी और उस पर काबिज रहते हुए, उसके बंधक के मुकाबले किसी भी ऋणदाता से आवधिक भुगतान का लाभ उठा सकता/सकती है ।
वरिष्ठ नागरिक उधारकर्ता को अपने जीवनकाल में ऋण का शोधन करने की ज़रूरत नहीं है और इसलिए उस ऋणदाता को मूलधन एवं ब्याज का मासिक पुनर्भुगतान नहीं करना पड़ता है ।
रिवर्स बंधक ऋण प्राथमिक ऋणदाता संस्थानों अर्थात् अनुसूचित बैंकों और राष्ट्रीय आवास बैंक में पंजीकृत आवास वित्त कंपनियों की ओर से दिया जाता है ।
ऋण की राशि ऋणदाता द्वारा आवासीय संपत्ति के आकलित मूल्य, उधारकर्ता(ओं) की आयु और प्रचलित ब्याज दर पर निर्भर करती है ।
ऋण मासिक/त्रैमासिक/अर्धवार्षिक/वार्षिक संवितरण के माध्यम से अथवा एकमुश्त प्रतिबद्ध आर्थिक सहायता के रूप में अथवा तीनों को मिलाकर दिया जा सकता है ।
ऋण की अधिकतम अवधि 20 वर्ष है ।
(अधिकतम अवधि जिसमें भुगतान रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) उधारकर्ता को किया जा सकता है) ।
वरिष्ठ नागरिक उधारकर्ता ऋण की राशि का उपयोग आवासीय संपत्ति के उन्नयन/अभिनवकरण/चिकित्सीय ज़रूरतों सहित विविध कार्यों के लिए कर सकता है । तथापि, रिवर्स मॉर्टगेज ऋण के उपयोग की अनुमति सट्टे का व्यापार करने और व्यवसाय करने के लिए नहीं है ।
ऋण की प्रमात्रा में संशोधन ऋणदाता के विवेकानुसार संपत्ति के पुनर्मूल्यांकन के आधार पर किया जा सकता है ।
उधारकर्ता(गण) आवासीय संपत्ति का उपयोग अपने प्राथमिक निवास के रूप में तब तक कर सकता/सकते/सकती है/हैं जब तक वह/वे जीवित रहता है/रहती है/हैं अथवा स्थायी रूप से संपत्ति छोड़ देता/देती है/हैं अथवा अपने स्थायी निवास के रूप में संपत्ति का उपयोग बंद कर देता/देती है/हैं ।
सभी रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) ऋण उत्पादों पर एक स्पष्ट और पारदर्शी अनकारात्मक साम्या (नो निगेटिव इक्विटी) अथवा सीमित ऋण गारंटी होने की आशा की जाती है । अर्थात् उधारकर्ता(ओं) को अपनी संपत्ति के निवल वसूली योग्य मूल्य से अधिक का देनदार नहीं होना पड़ेगा, बशर्ते ऋण के नियम एवं शर्तें पूरी कर दी गई हों ।
उधारकर्ता की मृत्यु पर अथवा उसकी ओर से आवासीय संपत्ति स्थायी रूप से छोड़ देने पर, ऋण का पुनर्भुगतान संचित ब्याज के साथ आवासीय संपत्ति की बिक्री से किया जाता है ।
उधारकर्ता(गण) उसके/उनके वारिस(गण) भी संचित ब्याज के साथ ऋण चुका सकता है/सकते हैं और संपत्ति को बेचे बिना बंधक छुड़ा सकता है/सकते हैं ।
उधारकर्ता(ओं) उसके/उनके वारिस(ाटं) के पास किसी भी समय ऋण की अवधि के दौरान अथवा बाद में, किसी भी पूर्वभुगतान उद्ग्रहण के बिना ऋण चुका देने का विकल्प भी होता है ।
 
कराधानगत विषय
 

वर्ष 2007-08 का केन्द्रीय बजट प्रस्तुत करते समय, वित्त मंत्री ने अपने भाषण के अनुच्छेद-89 में घोषणा की थी कि राष्ट्रीय आवास बैंक (रा.आ.बैंक) एक रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू करेगा ।

पूर्वोक्त योजना के प्रसंग में उससे उठने वाले कराधान संबंधी मुद्दों का समाधान करना आवश्यक है । पहला मुद्दा है कि क्या रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) ऋण योजना के अधीन ऋण प्राप्त करने के लिए संपत्ति का बंधक आयकर अधिनियम के अर्थ के भीतर अंतरण है जिससे पूंजी अभिलाभ को बढ़ावा मिलता है । आयकर अधिनियम की धारा 2(47) अंतरण की एक सम्मिलित परिभाषा उपबंधित करती है । इसके अतिरिक्त, संपत्ति अंतरण अधिनियम के अर्थ के भीतर बंधकों के कुछ प्रकार शामिल हैं । इसीलिए कतिपय मामलों में संपत्ति का कोई भी अंतरण आयकर अधिनियम की धारा 2(47) के अर्थ के भीतर एक अंतरण है । परिणामस्वरूप, किसी संपत्ति के बंधक से उत्पन्न किसी भी लाभ से आयकर अधिनियम की धारा 45 के अधीन पूंजी अभिलाभ को बढ़ावा मिल सकता है । तथापि, रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) के प्रसंग में, किसी मकान के बंधक के लिए नकदी प्रवाह की एक धारा बनाए रखने का आशय है और संपत्ति को संक्रामित करना नहीं ।

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 47 में एक नया खंड (xvi) यह उपबंधित करने के लिए निविष्ट किया गया है कि किसी रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) योजना के अधीन लेनदेन में किसी भी पूंजीगत आस्ति का केन्द्र सरकार द्वारा किया और अधिसूचित किया गया कोई अंतरण यथा अंतरण नहीं माना जाएगा ।

दूसरा मुद्दा है कि क्या किसी रिवर्स मॉटेगेज (विपरीत बंधक) योजना के अधीन या तो किस्तों में अथवा एकमुश्त प्राप्त हुआ ऋण आय होता है । ऐसे ऋण की प्राप्ति पूंजीगत प्राप्ति की प्रकृति में होती है । आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 में संशोधन यह उपबंधित करने के लिए किया गया है कि किसी व्यक्ति द्वारा या तो एकमुश्त अथवा किस्त में प्राप्त की गई राशि, आयकर अधिनियम की धारा 47 के खंड (xvi) में निर्दिष्ट रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) के किसी लेनदेन में कुल आय में शामिल नहीं की जाएगी ।

तथापि, किसी रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) योजना में कोई भी उधारकर्ता (पूंजी अभिलाभ पर कर की प्रकृति में) केवल ऋण वसूल करने के उद्देश्य से बंधकग्राही द्वारा बंधक रखी संपत्ति के अन्य संक्रामण पर आयकर का भागी होगा ।

 
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