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संवर्धन

आवास वित्त कंपनियों का संवर्धन एवं विकास

आवास वित्त कंपनियों को साम्य (इक्विटी) सहायता देने के लिए दिशा-निर्देश

राष्ट्रीय आवास बैंक उन आवास वित्त कंपनियों जो राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 की धारा 2 के खंड(डी) के अर्थ के भीतर आवास वित्त संस्थान हैं, को निम्नलिखित दिशा-निर्देश ख्रेस आधार पर उनके विकास और सुदृड्ढ़, अर्थक्षम एवं लागत प्रभावी होने के लिए जारी करता है ।

ये दिशा-निर्देश उन आवास वित्त कंपनियों में से ऐसी कंपनियों के लिए लागू होते हैं जो रा.आ.बैंक से साम्य भागीदारी का लाभ उख्रने की इह्वछुक हैं ।

ये दिशा-निर्देश 1 मार्च, 2003 से प्रवर्तन में आएंगे ।

संगख्र्न और प्रमुख गतिविधि

1.कोई भी आवास वित्त कंपनी जो रा.आ.बैंक की योजना के अधीन रा.आ.बैंक से साम्य भागीदारी का लाभ उख्रने की इह्वछुक है, यह अन्यों में :

क. एक सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी होगी,

ख. आवासीय उद्देश्यों के लिए, भारत में मकानों की खरीद या निर्माण के लिए दीर्घावधि वित्त प्रदान करेगी,

ग. आवास के लिए दीर्घावधि वित्त के माध्यम से नियोजित पूंजी का 75% निवेश करेगी ।

स्पष्टीकरण : इन दिशा-निर्देर्शों के उद्देश्यार्थ "नियोजित पूंजी" के अर्थ में निम्नलिखित शामिल होगा :

    i.कंपनी की चुकता पूंजी और अमूर्त को घटाकर उसकी निर्बंध आरक्षित निधियां,

    ii.दीर्घावधि उधार की राशियां,

    iii.सर्वसाधारण एवं अन्यों से वसूली गई पांच वर्षों या उससे अधिक की परिपक्वता अवधि वाली जमा राशियां - इसमें राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 की धारा 29बी में यथा अनुबंद्ध विनिर्दिष्ट परिसम्पत्ति में रखी जाने या अन्यथा रखी जाने के लिए आवश्यक राशि शामिल नहीं है ।

न्यूनतम चुकता पूंजी एवं सूचीबद्ध करने संबंधी अपेक्षाएं

आवास वित्त कंपनियों को रा.आ.बैंक से साम्य सहायता सहित दस करोड़ रुपए से अनधिक की न्यूनतम चुकता पूंजी या ऐसी अन्य राशि, जो रा.आ.बैंक की ओर से समय समय पर या भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड द्वारा शेयरों को मान्यता प्राप्त शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने के लिए निर्धारित की जाने वाली राशि में से जो भी अधिक हो, उतनी राशि रखनी चाहिए । शेयर पूंजी में प्रवर्तकों का न्यूनतम अंशदान हमेंशा वही होगा जोकि सार्वजनिक निर्गम जारी करने वाली किसी कंपनी के लिए लागू होता है ।

2.2 आवास वित्त संबंधी गतिविधि में सार्वजनिक भागीदारी के अतिरिक्त, साम्य आधार बड्ढ़ाने की दृष्टि से, यह अधिमान्य है कि आवास वित्त कंपनियां शीघ्र ही भारत के मान्यता प्राप्त शेयर बाजार में अपने शेयर सूचीबद्ध करा लें । यदि राष्ट्रीय आवास बैंक किसी समय यह महसूस करता है कि संबंधित आवास वित्त कंपनी के लिए जनता में जाने का समय समुचित है, तब यह निदेशक मंडल में उसके प्रतिनिधियों के माध्यम से उस आवास वित्त कंपनी को जनता में जाने के लिए सूचित करेगा । यदि वह आवास वित्त कंपनी ऐसे सुझाव पर कृत्य नहीं करती है, तब राष्ट्रीय आवास बैंक भविष्य में और पूंजीगत सहायता प्रदान नहीं करेगा । दूसरी ओर, रा.आ.बैंक यह आग्रह कर सकता है कि प्रवर्तकों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर रा.आ.बैंक का शेयरधारण खरीद लेना चाहिए ।

2.3 आवास वित्त कंपनी को रा.आ.बैंक अथवा इसके लिए सशक्त अन्य किसी प्राधिकारी की ओर से जारी किए गए अन्य सभी दिशा-निर्देशों अथवा आदेशों, अनुदेशों विनियमों/नियमों के अनुरूप होना चाहिए और/अथवा उनका अनुपालन करना चाहिए ।

2.4 किसी भी स्थिति में साम्य (इक्विटी) पूंजी में रा.आ.बैंक की भागीदारी आवास वित्त कंपनी की चुकता पूंजी के 10% से अधिक नहीं होगी ।

आवेदन प्रस्तुत करना

3. साम्य (इक्विटी) भागीदारी के माध्यम से रा.आ.बैंक की वित्तीय सहायता की इह्वछुक आवास वित्त कंपनियां ऐसे फॉर्म में अपना आवेदन प्रस्तुत करेंगी और ऐसी जानकारी/विवरण इत्यादि प्रस्तुत करेंगी जो रा.आ.बैंक को बैंक के विचारार्थ अपेक्षित हो ।

भूमि और भवन में निवेश

4. भूमि और भवन में आवास वित्त कंपनी का निवेश उस उह्वचतम सीमा से अधिक नहीं होगा जो समय-समय पर यथा संशोधित आवास वित्त कंपनी (रा.आ.बैंक) निर्देश, 2001 में विहित है ।

निदेशक मंडल

5. रा.आ.बैंक को उन आवास वित्त कंपनियों के निदेशक मंडल में दो निदेशकों को नियुक्त करने का अधिकार है जिनके पास रा.आ.बैंक की साम्य (इक्विटी) भागीदारी है । तथापि, किसी बैंक/वित्तीय संस्थान/सरकार से साम्य (इक्विटी) भागीदारी रखने वाली और उसके निदेशक मंडल में ऐसे बैंक/वित्तीय संस्थान/सरकार के नामिती निदेशकों के रूप में दो व्यक्तियों को रखने वाली किसी आवास वित्त कंपनी के मामले में, रा.आ.बैंक ऐसी आवास वित्त कंपनी के निदेशक मंडल में अपने नामिती के रूप में केवल एक निदेशक नियुक्त करेगा । आवास वित्त कंपनी के अन्तर्नियमों में नामिती निदेशक की नियुक्ति का प्रावधान होना चाहिए । आवास वित्त कंपनी के मुख्य कार्यपालक की नियुक्ति रा.आ.बैंक के परामर्श से की जानी चाहिए ।

ऋण-पात्रता निर्धारण (क्रेडिट रेटिंग)

6. रा.आ.बैंक किसी आवास वित्त कंपनी की न्यूनतम साम्य (इक्विटी) पूंजी का निर्धारण (ग्रेडिंग) निर्धारित कर सकता है ।

शेयर-धारक का करार

7. आवास वित्त कंपनी नया व्यापार हाथ में लेने, समामेलन, विलय,ग्रहण करने, सहायक कंपनियों के विपणन, गौण कंपनियों में निवेश, नामिती निदेशकों की नियुक्ति, इत्यादि जैसे मौलिक विषयों के बारे में प्रसंविदा निर्धारित करते हुए, रा.आ.बैंक के साथ शेयर-धारक के करार पर हस्ताक्षर करेगी । प्रसंविदा में यह प्रावधान भी होगा कि भविष्य में यदि किसी समय प्रवर्तकगण रा.आ.बैंक का शेयरधारण खरीदना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसा मूल्य देना चाहिए जो पिछले संपरीक्षित तुलन-पत्र के अनुसार बही-मूल्य से कम नहीं है ।

शेयरों का मूल्यन/निवेश की लागत

8. साम्य (इक्विटी) शेयरों के लाभांशकारी प्रथम सार्वजनिक निर्गम और लाभप्रदता के पिछले रिकॉर्ड के बिना नई आवास वित्त कंपनियों के मामले में, साम्य शेयरों में अभिदान रा.आ.बैंक द्वारा सममूल्य पर किया जाएगा और वर्तमान कंपनियों के मामले में, मूल्य रा.आ.बैंक के निदेशक मंडल की ओर से अवधारित एवं अनुमोदित किया जाएगा ।

अन्य

9. रा.आ.बैंक की ओर से साम्य (इक्विटी) पूंजी में भागीदारी उसके एकमात्र विवेक पर होगी और अधिकार के विषय के रूप में उसका दावा नहीं किया जाएगा ।

10. i) उपर्युक्त दिशा-निर्देश रा.आ.बैंक की ओर से 04 जुलाई, 1997 को जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अधिक्रमण में हैं ।

ii) 04 जुलाई, 1997 को रा.आ.बैंक की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अधिक्रमण के होते हुए भी, किया गया कोई कृत्य अथवा कार्य, की गई कार्रवाई, उसके अधीन प्रदत्त पुनर्वित्त अथवा अन्य सुविधाएं कथित दिशा-निर्देशों से इस तरह अभिशासित होती रहेंगी मानो कि वे दिशा-निर्देश अधिक्रमित नहीं हुए हैं ।

 
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